टाटा मोटर्स में नौकरी का झांसा देकर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़

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October 23, 2026

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टाटा मोटर्स में नौकरी का झांसा देकर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़

-नॉर्थ जिला पुलिस ने फर्जी भर्ती रैकेट का किया पर्दाफाश, पांच आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली, 6 सितंबर। दिल्ली पुलिस के नॉर्थ जिला पुलिस ने बेरोजगार युवाओं को टाटा मोटर्स समेत नामी कंपनियों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी करने वाले एक संगठित फर्जी भर्ती रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी कॉल सेंटर के जरिए नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को फोन करते थे और भर्ती प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों के नाम पर उनसे लगातार पैसे वसूलते थे।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के कब्जे से 12 मोबाइल फोन, एक टैबलेट, सात एटीएम/डेबिट कार्ड, दो बैंक पासबुक, तीन नोटपैड और 6,730 रुपये नकद बरामद किए गए हैं। इसके अलावा फर्जी टाटा मोटर्स ज्वाइनिंग लेटर और क्यूआर कोड भी जांच के दौरान सामने आए हैं।

गुप्त सूचना पर हुई छापेमारी
पुलिस के अनुसार, 1 सितंबर 2026 को AATS/नॉर्थ जिला की टीम को सूचना मिली थी कि संगम विहार, झरोदा माजरा क्षेत्र में एक फर्जी कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा है। यहां बेरोजगार लोगों को टाटा मोटर्स और अन्य प्रतिष्ठित कंपनियों में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगा जा रहा था।
सूचना का सत्यापन करने के बाद पुलिस टीम ने मौके पर छापेमारी की। वहां सतीश चंदर मौर्या उर्फ करण उर्फ हरीश समेत अन्य टेली-कॉलर नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों से संपर्क करते मिले। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपियों द्वारा डेटा एंट्री ऑपरेटर, डेटा एनालिस्ट, वेब डिजाइनर और अकाउंटेंट जैसे पदों पर नौकरी का झांसा दिया जाता था।
नौकरी के नाम पर किस्तों में वसूली
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी पहले उम्मीदवारों से 499 रुपये कुरियर चार्ज के नाम पर मांगते थे। इसके बाद भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर अलग-अलग बहाने बनाकर लगातार रकम मांगी जाती थी।
आरोपियों द्वारा कथित तौर पर—
1,500 रुपये ड्रेस/यूनिफॉर्म चार्ज
3,500 रुपये लैपटॉप सिक्योरिटी
5,500 रुपये अकाउंट खोलने के नाम पर
6,500 रुपये मेडिकल सिक्योरिटी
8,500 रुपये एफिडेविट चार्ज
जैसी रकम मांगी जाती थी। इस तरह अलग-अलग चरणों में पीड़ित से कुल 25,999 रुपये तक वसूलने का तरीका अपनाया जाता था।
जब कोई पीड़ित आगे पैसे देने से इनकार करता या असमर्थता जताता तो आरोपी कथित तौर पर उसका मोबाइल नंबर ब्लॉक कर देते और उससे संपर्क खत्म कर देते थे।
नौकरी पोर्टल से जुटाते थे उम्मीदवारों का डेटा
जांच में पुलिस को पता चला कि आरोपी नौकरी तलाश रहे उम्मीदवारों का व्यक्तिगत डेटा “Job Hai Support”/“Job Hai Recruiter” एप के जरिए हासिल करते थे। इसके बाद खास तौर पर उन उम्मीदवारों को निशाना बनाया जाता था, जिन्होंने टाटा मोटर्स में नौकरी के लिए आवेदन किया था।
आरोपी खुद को भर्ती प्रक्रिया से जुड़े प्रतिनिधि के रूप में पेश करते और उम्मीदवारों को विश्वास दिलाते थे कि वे टाटा मोटर्स में चयनित हो चुके हैं। इसके बाद फर्जी भर्ती प्रक्रिया के नाम पर एक के बाद एक भुगतान की मांग की जाती थी।
दो और आरोपियों की भूमिका सामने आई
छापेमारी के दौरान तीन आरोपी कथित तौर पर फर्जी भर्ती व्यवस्था को संचालित करते मिले। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने नेटवर्क में शामिल दो अन्य आरोपियों की भूमिका का भी पता लगाया, जिन्हें बाद में ट्रेस कर गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब सभी आरोपियों की भूमिका, नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और पैसों के लेन-देन की जांच कर रही है।
बैंक खातों और क्यूआर कोड से लेते थे रकम
पूछताछ में आरोपी सतीश चंदर मौर्या उर्फ करण उर्फ हरीश और प्रीति उर्फ सुप्रिया ने कथित तौर पर फर्जी जॉब रिक्रूटमेंट कॉल सेंटर के संचालन से जुड़ी जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, उम्मीदवारों को टाटा मोटर्स में विभिन्न पदों पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे लगातार भुगतान कराया जाता था।
ठगी की रकम अलग-अलग बैंक खातों से जुड़े क्यूआर कोड के माध्यम से प्राप्त की जाती थी। इस काम में कई सिम कार्ड, डिजिटल डिवाइस और फर्जी टाटा मोटर्स ज्वाइनिंग लेटर का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
पांचों आरोपियों की प्रोफाइल
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सतीश चंदर मौर्या उर्फ करण उर्फ हरीश (30), बिंदिया उर्फ माही (20), प्रीति उर्फ सुप्रिया (22), प्राची उर्फ स्वीटी उर्फ नेहा (19) और राधिका उर्फ भूमि उर्फ अंशु (19) के रूप में हुई है।
सतीश चंदर मौर्या मुकुंदपुर, दिल्ली का रहने वाला है और मूल रूप से सिद्धार्थ नगर, उत्तर प्रदेश का निवासी है। उसने एमएससी तक पढ़ाई की है और पूर्व में एक्सिस बैंक में काम कर चुका है। बिंदिया बीए की पढ़ाई कर रही है। प्रीति ने 11वीं तक शिक्षा प्राप्त की है, जबकि प्राची और राधिका दिल्ली के बुराड़ी क्षेत्र की रहने वाली बताई गई हैं।
पुलिस टीम की कार्रवाई
पूरी कार्रवाई डीसीपी नॉर्थ निहारिका भट्ट, आईपीएस के समग्र पर्यवेक्षण में की गई। कार्रवाई में एडिशनल डीसीपी-I पुखराज कमल गुप्ता, आईपीएस, एडिशनल डीसीपी-II राम दलेश मीणा, एसीपी/ऑपरेशंस विशेष धत्तरवाल और इंस्पेक्टर संजय कुमार गुप्ता, प्रभारी AATS/नॉर्थ के नेतृत्व में पुलिस टीम शामिल रही।
टीम में एसआई हीरा लाल, एसआई दिनेश सिंह, एएसआई ओमप्रकाश, हेड कांस्टेबल संदीप, हेड कांस्टेबल रविंदर, हेड कांस्टेबल शक्ति, हेड कांस्टेबल आलोक, महिला हेड कांस्टेबल पूजा और कांस्टेबल विक्रम शामिल थे।
आगे की जांच जारी
पुलिस अब इस पूरे फर्जी भर्ती नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच कर रही है। साथ ही नौकरी तलाशने वाले उम्मीदवारों का डेटा कहां से हासिल किया गया, किन बैंक खातों और क्यूआर कोड में ठगी की रकम जमा हुई, रकम को आगे किन लोगों तक पहुंचाया गया और इस नेटवर्क ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया—इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
बरामद मोबाइल फोन, टैबलेट और अन्य डिजिटल उपकरणों की तकनीकी जांच भी की जा रही है, जिससे गिरोह के व्यापक नेटवर्क और ठगी से जुड़े अन्य मामलों का पता लगाया जा सके।

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