वर्ण-जाति पुरानी व्यवस्था, इसे अब भूल जाना चाहिए- मोहन भागवत

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

October 2026
MTWTFSS
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031 
October 25, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

वर्ण-जाति पुरानी व्यवस्था, इसे अब भूल जाना चाहिए- मोहन भागवत

-कहा- पिछली पीढ़ियों की गलतियों को सुधारने में ही सबकी भलाई, इससे पहले रोजगार व आरक्षण पर भी दे चुके हैं बयान

नागपुर/- देश में इन दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस पर सभी की निगाहें जमी हुई है कि आरएसएस कब क्या संदेश देता है। केंद्र में भाजपा की सरकार होने के चलते उसकी प्रमुख संस्था आरएसएस को ही सरकार चलाने के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। केंद्र सरकार आरएसएस के फैसलों को मानने व लागू करने में पूरी तरह प्रयत्नशील दिखाई दे रही है। जिसकारण आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के प्रत्येक बयान को पूरे देश में बड़ी गंभीरता के साथ देखा जा रहा है।

हाल ही में मोहन भागवत ने दशहरा पूजा के अवसर पर वर्ण एवं जाति व्यवस्था पर बड़ा बयान देकर सभी को चौंका दिया है। उन्होने कहा कि वर्ण-जाति पुरानी व्यवस्था है इसे अब भूल जाना चाहिए। उनका कहने का अर्थ यह है कि पिछली पीढ़ियों ने वर्ण व जाति व्यवस्था को बनाकर जो गलतियां की है उन्हे सुधारने में ही सबकी भलाई है। इससे पहले वह रोजगार व आरक्षण पर भी अपना बयान दे चुकें हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख का आरक्षण को लेकर बयान फिर चर्चा में है। नागपुर में शुक्रवार को एक किताब के विमोचन के दौरान सर संघचालक मोहन भागवत ने जाति और वर्ण व्यवस्था को खत्म करने की अपील की है। भागवत ने कहा- समाज का हित चाहने वाले हर व्यक्ति को यह कहना चाहिए कि वर्ण और जाति व्यवस्था पुरानी सोच थी जिसे अब भूल जाना चाहिए। इससे पहले दशहरे पर उन्होंने रोजगार के लिए नौकरियों की तरफ न देखने की सलाह दी थी।

भागवत ने शुक्रवार को कहा कि ऐसी कोई भी चीज जो भेदभाव पैदा कर रही हो उसे पूरी तरह से खारिज कर देना चाहिए। भारत हो या फिर कोई और देश, पिछली पीढ़ियों ने गलतियां जरूर की हैं। हमें उन गलतियों को स्वीकार करने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। अगर आपको लगता है कि हमारे पूर्वजों ने गलती की है, ये बात मान लेने पर उनका महत्व कम हो जाएगा तो ऐसा नहीं है, क्योंकि हर किसी के पूर्वजों ने गलतियां की हैं।

जातियां हटेंगी तो आरक्षण पर असर पड़ेगा

आरएसएस चीफ के इस बयान को देश में आरक्षण की समीक्षा से जोड़ा जा रहा है, क्योंकि देश में आरक्षण का सिस्टम जाति पर ही आधारित है। ऐसे में जाति व्यवस्था को खत्म करने की बात कहना आरक्षण की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करने जैसा ही है। इस तरह के बयान जब भी सामने आए, विपक्ष ने उनका कड़ा विरोध किया।

दशहरे पर रोजगार से जुड़े बयान पर भी विवाद हुआ

दशहरे पर भागवत ने कहा था कि नौकरियों पर निर्भरता ठीक नहीं है, तब लालू ने उन पर वोट के लिए नौकरी का वादा करने का आरोप लगाया था।दशहरे पर नागपुर में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा था, ’भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में आर्थिक तथा विकास नीति रोजगार उन्मुख हो, यह अपेक्षा स्वाभाविक ही कही जाएगी, लेकिन रोजगार यानी केवल नौकरी नहीं यह समझदारी समाज में भी बढ़ानी पड़ेगी। कोई काम प्रतिष्ठा में छोटा या हल्का नहीं है, परिश्रम, पूंजी तथा बौद्धिक श्रम सभी का महत्व समान है। उद्यमिता की ओर जाने वाली प्रवृत्तियों को प्रोत्साहन देना होगा। स्टार्टअप इसमें अहम भूमिका निभा रहा है। इसे और आगे बढ़ाने की जरूरत है।’

संघ प्रमुख के इस बयान पर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद ने कहा कि ’आरएसएस की ठग विद्या से प्रशिक्षित एवं संघ की महाझूठी, महाकपटी पाठशाला से निकले जुमलेबाज विद्यार्थी ही सालाना 2 करोड़ नौकरी प्रतिवर्ष देने का वादा कर वोट बटोरते हैं? जब जब भाजपा-आरएसएस अपनी ही बेफिजूल की बातों में फंसती है तो नफरत फैलाने वाले सज्जन बिन मांगा ज्ञान बांटने चले आते हैं।

’जनसंख्या असंतुलन पर नजर रखनी होगी

भागवत ने नागपुर में दशहरा समारोह में वुमन, पॉपुलेशन, एजुकेशन पर एक घंटे तक स्पीच दी थी। उन्होंने कहा, ’एक व्यापक जनसंख्या नियंत्रण नीति की जरूरत है। जो सभी पर बराबरी से लागू होती हो। राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए जनसंख्या असंतुलन पर हमें नजर रखनी होगी।

भागवत ने पहले कहा था- खाने और बच्चे पैदा करने का काम जानवर भी करते हैं

मोहन भागवत 3 महीने पहले कर्नाटक की श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए थे। इस दौरान भागवत ने कहा- जनसंख्या बढ़ाने और खाने का काम तो जानवर भी करते हैं। ये जंगल में सबसे ताकतवर रहने के लिए जरूरी है। ताकतवर ही जिंदा रहेगा, ये जंगल का कानून है। इंसानों में ऐसा नहीं है। इंसानों में जब ताकतवर दूसरे की रक्षा करता है तो ये ही इंसानियत की निशानी है।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox