वक्फ संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी, एएसआई संरक्षित स्मारकों पर वक्फ का दावा समाप्त

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October 8, 2026

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वक्फ संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी, एएसआई संरक्षित स्मारकों पर वक्फ का दावा समाप्त

नई दिल्ली/अनीशा चौहान/- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार (5 अप्रैल) देर रात वक्फ संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी, जिससे यह विधेयक अब कानून का रूप ले चुका है। इस संबंध में केंद्र सरकार ने आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी है। इस कानून के लागू होने के बाद देशभर में वक्फ संपत्तियों को लेकर कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।

नए कानून के तहत अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित स्मारकों और स्थलों पर वक्फ बोर्ड का कोई दावा मान्य नहीं होगा। यानी अब वक्फ बोर्ड इन स्मारकों पर अपना हक नहीं जता सकेगा।

गौरतलब है कि यह विधेयक पहले लोकसभा और फिर राज्यसभा में पारित हुआ था। इसके बाद यह राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया था, जो अब मिल चुकी है। कई केंद्रीय मंत्रियों ने इस कानून को एक “ऐतिहासिक बदलाव” बताया है।

हालांकि, इस कानून को लेकर देशभर में सियासी घमासान भी छिड़ा हुआ है। कई राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन इस विधेयक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि कुछ वर्गों ने इसे देशहित में उठाया गया सकारात्मक कदम बताया है।

क्या हैं नए प्रावधान?

इस संशोधित कानून में केंद्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए हैं। अब वक्फ बोर्ड किसी भी संपत्ति पर मनमाने ढंग से दावा नहीं कर सकेगा। किसी संपत्ति पर विवाद होने की स्थिति में मामला अदालत में चुनौती देने योग्य होगा।

साथ ही, अब वही व्यक्ति वक्फ को संपत्ति दान कर सकेगा, जो कम से कम पांच वर्षों से इस्लाम धर्म का पालन कर रहा हो। इसके अलावा, आदिवासी बहुल क्षेत्रों की जमीनों और संपत्तियों को अब वक्फ संपत्ति घोषित नहीं किया जा सकेगा।

विरोध करने वालों का कहना है कि यह कानून मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाता है, वहीं केंद्र सरकार का दावा है कि इस कानून से न तो मस्जिदों को छुआ जाएगा और न ही कब्रिस्तानों को। सरकार का यह भी कहना है कि यह कानून मुस्लिम महिलाओं को अधिकार देने और उन्हें सशक्त करने में मदद करेगा।

वक्फ कानून में हुए इस बदलाव को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इसका असर राजनीतिक गलियारों में भी देखने को मिल सकता है।

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