-स्वर कोकिला लता मंगेशकर को कई बरस पहले जान से मारने की साजिश रची गई थी. जानिए इस अनसुने किस्से के बारे में.
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- अपनी मधुर आवाज से करोड़ों लोगों पर धाक जमाने वाली स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने दुनिया को हमेशा-हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। इन्होंने बॉलीवुड फिल्मों में कई ऐसे गाने गाए हैं जो लोगों की जुबां पर आज तक है लेकिन आज हम आपको लता मंगेशकर से जुड़ा वो किस्सा बताएंगे शायद जिसकी आपको खबर तक ना हो। ये किस्सा एक साजिश का है जिसमें लता दीदी को जान से मारने के लिए जहर तक दे दिया गया था।
33 की उम्र में मारने की रची गई थी साजिश
लता दीदी (स्ंजं डंदहमेांत) के इस जान से मारने वाले किस्से का जिक्र लता मंगेशकर के करीबी मित्र पद्मा सचदेव की किताब ’ऐसा कहां से लाऊं’ में भी है. इसमें बताया गया है कि गायिका को मारने के लिए 33 साल की उम्र में साजिश रची गई थी.
खाने में मिलाकर दिया गया था जहर
ये घटना साल 1963 की है. लता मंगेशकर (स्ंजं डंदहमेांत) गंभीर रूप से बीमार पड़ गई थीं. डॉक्टरों को बुलाया गया और मेडिकल जांच में पता चला कि उन्हें ैसवू च्वपेवद (जहर) दिया गया था. इस घटना ने गायिका को शारीरिक रूप से कमजोर बना दिया, और वह लगभग तीन महीने तक बिस्तर पर पड़ी रही थीं।
खाना चेक करते ही दिया जाने लगा
इस घटना के तुरंत बाद उनका रसोइया बिना मजदूरी लिए घर से गायब हो गया था. इसके बाद दिवंगत बॉलीवुड गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी नियमित रूप से दीदी के पास जाते थे, पहले उनके भोजन का स्वाद चखते थे और उसके बाद ही उन्हें खाने की अनुमति देते थे।
5,000 से ज्यादा गाए गाने
लता मंगेशकर (स्ंजं डंदहमेांत) ने एक हजार से ज्यादा हिंदी फिल्मों और 36 क्षेत्रीय फिल्मों में गाना गाया है. कुछ मिलाकर वो 5,000 से अधिक गानों में अपना आवाज दे चुकी हैं. इतने साल में लता दीदी ने मधुबाला से लेकर प्रियंका चोपड़ा तक के लिए अपनी आवाज दी है।
पिता के निधन के बाद परिवार को संभाला
लता मंगेशकर के पिता का निधन साल 1942 में हो गया था. बड़ी संतान होने के कारण परिवार का सारा भार लता जी के कंधों पर आया. जिसके बाद लता जी ने पिता के दोस्त मास्टर विनायक ने उन्हें बड़ी मां फिल्म में रोल ऑफर किया, जिसके लिए वो मुंबई आईं. इसके साथ ही लता जी ने उस्ताद अमन अली खान से हिंदुस्तानी म्यूजिक सीखा. लता दीदी ने अपने करियर में कई लिजेंड्री म्यूजिक डाटरेक्टर के संग काम किया है. जिसमें मदन मोहन, आर.डी बर्मन, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और एआर रहमान शामिल हैं।


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