आसान नही था स्वर कोकिला का स्वर साम्राज्ञी बनने का सफर

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आसान नही था स्वर कोकिला का स्वर साम्राज्ञी बनने का सफर

-शुरू में लोगों ने काम देने से कर दिया था इंकार, नकार दी थी आवाज
-धीमा जहर देकर मारने की भी की गई थी कोशिश, उनका गाना सुन प्रधानमंत्री की भी आंखें हो गई थी नम

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- आज हम जिस शख्सियत का शोक मना रहे है एक दिन वही शख्सियत काम पाने के लिए कड़ा संघर्ष कर रही थी। लता जी ने भी अपने जीवन में नाकामी देखी। काम न मिलने का दुःख झेला और आवाज नकार दिये जाने का दर्द भी सहा। आज चाहे वह कितनी भी बुलंदी पर क्यों ना पंहुची हो लेकिन उनका स्वर कोकिला बनने का सफर आसान नही था। आज भले ही पूरा विश्व उनकी आवाज का दीवाना हो लेकिन एक दिन ऐसा भी था जब इसी आवाज को नकार दिया गया था। शुरूआती दिनों में उन्होने ने भी काफी संघर्ष भरा जीवन जीया था। लेकिन अपने मजबूत इरादो व बुलंद हौंसलों के कारण ही लता जी ने स्वर कोकिला से स्वर साम्राज्ञी बनने तक का सफर तय किया। फिर भी उनके मन में कभी भी किसी के प्रति द्वेष नही दिखाई दिया। हालांकि जब वह अपने सुनहरें दिनों में प्रवेश कर रही थी तब उन्हे धीमा जहर देकर मारने की भी कोशिश की गई थी लेकिन फिर भी उन्होने जानते हुए भी अपने दोषियों को कभी कुछ नही कहा। देखिए लता मंगेशकर जी कैसे बनीं स्वर कोकिला।
                 लता जी अब इस दुनिया में नहीं रहीं। उनके निधन की खबर सुनकर आज हर आंख नम है। देश की बुलबुल अब और नहीं गा सकेगी लेकिन उनकी आवाज और गाने अमर हैं। वह हमेशा लोगों के दिलों में रहेंगी। लता मंगेशकर के गाने कानों से दिल की गहराइयों में उतरते हैं। उनके कुछ गीत तो ऐसे हैं जिन्हें सुनकर बड़ी से बड़ी हस्तियां अपने आंसू नहीं रोक पाईं। ऐसा ही एक गाना है ऐ मेरे वतन के लोगों…जरा आंख में भर लो पानी। इस गाने को सुनकर उस वक्त देश के प्रधानमंत्री रहे जवाहर लाल नेहरू भी रो पड़े थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी रो चुके हैं। इस गाने को लिखे जाने की कहानी बड़ी रोचक है। यहीं से उनके स्वर कोकिला बनने का सफर शुरू हुआ था। आईये जानते हैं इस दिल में बसने वाले गाने से जुड़ी कुछ रोचक बातें।
                  सुर सम्राज्ञी लता मंगेशकर का गाया एक-एक गाना लोगों की रूह छूने वाला है। सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में उनके गाने पसंद किए जाते हैं। लता ने हजारों गाने गाए हैं, इनमें से ऐ मेरे वतन के लोगो बेहद खास है। लता ने 27 जनवरी 1963 में यह गाना दिल्ली के रामलीला मैदान में गाया था। उस वक्त प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री थे। यह गाना उन सैनिकों की याद में लिखा गया था जो कि 1962 के भारत-चीन युद्ध में शहीद हो गए थे। हालांकि लता मंगेशकर जी ने पहले यह गाना गाने से मना कर दिया था। गाने के लेखक कवि प्रदीप ने लता को मनाया था। लता जी लाइव परफॉर्मेंस से पहले सिर्फ एक बार रिहर्सल कर पाई थीं। लता जी ने खुद ये सब खुलासे, 2014 में इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में किए थे।
              लता जी ने बताया था कि जब कार्यक्रम खत्म हुआ, नेहरू उनसे बात करना चाहते थे। लता बताती हैं, पहले तो मैं नर्वस हो गई थी, मुझे लगा कि कोई गलती हो गई है। लेकिन जब मैं पंडितजी से मिली, मुझे उनकी आंखों में आंसू दिखे…उन्होंने कहा, लता तूने मुझे रुला दिया।
              डेलीओ की रिपोर्ट के मुताबिक, गाने को ओपनिंग स्टैंजा (ऐ मेरे वतन के लोगो, तुम खूब लगा लो नारा…) लिरिसिस्ट प्रदीप को उस वक्त सूझा था जब वह मुंबई के माहिम बीच पर वॉक कर रहे थे। उन्होंने रास्ते में किसी से पेन मांगा और अपने सिगरेट के पैकेट की फॉइल फाड़ी और लाइनें लिख लीं। प्रधानमंत्री के सामने होने वाले इवेंट में कई लोगों के गाने थे जो बहादुरी और वीरगाथा वाले थे। सिर्फ प्रदीप के गाने में जवानों के बलिदान और उनके कष्टों का जिक्र था। इस वजह से इस गाने को सरप्राइज के तौर पर रखा गया था।
               27 जनवरी 2014 को मुंबई में स्वर्ण जयंती समारोह हुआ था। इस इवेंट में नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे। उस वक्त वह देश के प्रधानमंत्री नहीं बने थे बल्कि दावेदार थे। वहां लता मंगेशकर ने सबके सामने ये गाना गाया तो नरेंद्र मोदी भी इमोशनल हो गए थे।

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