मुफ्त योजनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकारों से पूछा बड़ा सवाल

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October 8, 2026

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मुफ्त योजनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकारों से पूछा बड़ा सवाल

नई दिल्ली/सिमरन मोरया/-  सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव से पहले दी जाने वाली मुफ्त योजनाओं यानी ‘फ्रीबीज’ पर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने राज्य सरकारों से सवाल किया कि अगर वे “मुफ्त राशन, मुफ्त बिजली” जैसी योजनाएं बांटती रहेंगी, तो असली विकास कार्यों के लिए पैसा कहां से लाएंगी? मामले की सुनवाई उस समय हुई जब चुनावी राज्य Tamil Nadu की पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने सभी उपभोक्ताओं को, उनकी आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना, मुफ्त बिजली देने का प्रस्ताव रखा। इस पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई।

मुख्य न्यायाधीश ने किया ये सवाल
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि हम देश में कैसी संस्कृति बना रहे हैं? सुबह से मुफ्त खाना, फिर मुफ्त साइकिल, फिर मुफ्त बिजली और अब सीधे लोगों के खातों में पैसे ट्रांसफर किए जा रहे हैं। सोचिए, इसका क्या असर होगा? कोर्ट ने कहा कि जो लोग सच में जरूरतमंद हैं, उन्हें सहायता देना सरकार का कर्तव्य है। लेकिन जो लोग भुगतान करने में सक्षम हैं, उन्हें भी बिना किसी भेदभाव के मुफ्त सुविधाएं देना ठीक नहीं है। अदालत ने पूछा कि क्या अब समय नहीं आ गया है कि राज्य सरकारें अपनी नीतियों की समीक्षा करें?

इन चीजों के लिए नहीं बचता पैसा
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हर राज्य को अपनी कमाई का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा विकास कार्यों पर खर्च करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई राज्य बजट घाटे की बात करते हैं और विकास के लिए पैसे की कमी बताते हैं, लेकिन चुनाव के समय मुफ्त योजनाएं बांटते रहते हैं। इससे बुनियादी ढांचे, अस्पतालों, स्कूलों और कॉलेजों के लिए पैसा नहीं बचता।

मुफ्त योजना का देना होगा हिसाब
पीठ में शामिल न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि अगर कोई राज्य मुफ्त योजना लागू करना चाहता है, तो उसे अपने बजट में साफ तौर पर बताना होगा कि इसके लिए पैसा कहां से आएगा और कैसे खर्च होगा। कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से इस सवाल का जवाब मांगा है कि मुफ्त बिजली देने के लिए फंड कहां से आएगा। साथ ही केंद्र सरकार को भी नोटिस जारी किया गया है। मामला फिलहाल विचाराधीन है।

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