महावीर जयंती पर अंतरराष्ट्रीय मंच से गूंजा अहिंसा का संदेश 

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September 17, 2026

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-‘वीरों की अहिंसा’ पर हुआ विशेष कार्यक्रम -वैश्विक मंच पर अहिंसा और शाकाहार का संदेश

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- नई दिल्ली में महावीर जयंती के अवसर पर राम जानकी संस्थान पॉजिटिव ब्रॉडकास्टिंग हाउस (आरजेएस पीबीएच) और आरजेएस पॉजिटिव मीडिया द्वारा “वीरों की अहिंसा” विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य आज के तनावपूर्ण वैश्विक माहौल में भगवान महावीर के सिद्धांतों को अपनाने का संदेश देना था। कार्यक्रम में अहिंसा को केवल धार्मिक विचार नहीं, बल्कि आधुनिक समाज और अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक मार्गदर्शन के रूप में प्रस्तुत किया गया।

‘जियो और जीने दो’ का संदेश बना केंद्र बिंदु
कार्यक्रम के दौरान संस्थान के संस्थापक उदय कुमार मन्ना ने भगवान महावीर के मूल मंत्र “जियो और जीने दो” को मानवता के अस्तित्व के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। इस मौके पर फरवरी-मार्च 2026 का संयुक्त मंथली न्यूज़लेटर भी लॉन्च किया गया, जिसे स्वर्गीय राम जग सिंह की स्मृति को समर्पित किया गया।

विदेशों में बढ़ रहा शाकाहार और नैतिक जीवनशैली का चलन
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नितिन मेहता (एमबीई), जो लंदन स्थित इंडियन वेजिटेरियंस एंड वीगन सोसायटी के संस्थापक हैं, ने बताया कि यूनाइटेड किंगडम में शाकाहार और योग तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि वहां के लोग अब न केवल भोजन में बल्कि जीवनशैली में भी अहिंसा को अपना रहे हैं और चमड़े से बने उत्पादों का बहिष्कार कर रहे हैं।

अहिंसा को बताया सच्ची वीरता का प्रतीक
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. दीपक जैन ने कहा कि अहिंसा कमजोरी नहीं, बल्कि आंतरिक शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि सच्ची वीरता अपने भीतर के शत्रुओं—अहंकार, लोभ, क्रोध, मोह और घृणा—पर विजय पाने में है। उन्होंने शाकाहार को पर्यावरण संरक्षण और बेहतर स्वास्थ्य से भी जोड़ा।

नई पीढ़ी को अहिंसा से जोड़ने पर जोर
कार्यक्रम में प्रवासी भारतीय नरेंद्र के जैन ने मॉरीशस में महावीर जयंती के अवसर पर आयोजित अहिंसा वॉक और सामूहिक प्रार्थनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को बचपन से ही अहिंसा और नैतिक मूल्यों से जोड़ना जरूरी है, ताकि यह विचारधारा उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन सके।

समाज के लिए नई दिशा
इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने भाग लिया और यह संदेश दिया कि अहिंसा, शाकाहार और नैतिक जीवनशैली को अपनाकर ही समाज को बेहतर और संतुलित बनाया जा सकता है।

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