पूर्व विधायक गुलाब सिंह यादव ने किसानों के बीच पहुंचकर सुनी समस्याएं, रेखा सरकार से मुआवजे की मांग; किसानों ने सांसद कमलजीत सहरावत और विधायक संदीप सहरावत से मुआवजे की मांग
नजफगढ़ मेट्रो न्यूज/नई दिल्ली/विजय त्यागी एडिटर : पश्चिमी दिल्ली किसान की आंखों में आंसू हैं और उसकी महीनों की मेहनत खेत में गिरी पड़ी है। दो दिन की तेज हवा-वर्षा ने पककर तैयार खड़ी धान की फसल को जमीन पर ला दिया, वहीं अभी-अभी बोए गए सरसों के बीच खेत में पानी भरने से सड़ने लगे हैं। खेत में खड़े किसान अब सरकार की तरफ टकटकी लगाए हैं कि कब गिरदावरी होगी और कब मिलेगा मुआवजा। प्रभावित किसानों ने दिल्ली सरकार से नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने की मांग की है।
हाल ही में बोई गई सरसों की फसल को भी नुकसान, प्रभावित किसानों ने दिल्ली सरकार से मुआवजा देने की मांग की
आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक गुलाब सिंह यादव किसानों के बीच पहुंचे और उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान किसानों ने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी पर पहले ही बड़ी रकम खर्च हो चुकी है। ऐसे में फसल खराब होने से उनकी लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। किसानों ने मौजूदा रेखा सरकार से नुकसान का आकलन कर जल्द राहत देने की मांग की।
किसानों को याद आई पिछली सरकार की आर्थिक सहायता
किसानों ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान फसल नुकसान पर 20 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया गया था। उनके मुताबिक, उस समय किसानों को आर्थिक मदद देकर राहत पहुंचाने की कोशिश की गई थी। किसानों ने मौजूदा सरकार से भी इसी तरह प्रभावी सहायता देने की मांग की है।
सांसद कमलजीत सहरावत और विधायक संदीप सहरावत से मुआवजे की मांग
ग्रामीण किसानों ने सांसद कमलजीत सहरावत और संदीप सहरावत से भी अपील की कि वे फसल बर्बादी का मुद्दा विधानसभा और संबंधित मंचों पर उठाएं, ताकि सरकार तक उनकी परेशानी पहुंचे। किसानों का कहना है कि खेतों में वास्तविक नुकसान का जायजा लेकर निष्पक्ष सर्वे कराया जाना चाहिए और उसी के आधार पर मुआवजा तय किया जाना चाहिए।
लगातार मौसम की मार से खेती पर संकट
किसानों के अनुसार, पिछले साल भी मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण फसलों को नुकसान हुआ था। इस बार फिर बेमौसम बारिश ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। खेती की बढ़ती लागत और अनिश्चित मौसम के कारण किसानों के लिए परिवार का खर्च चलाना, बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना और खेती के लिए लिया गया कर्ज चुकाना कठिन होता जा रहा है।
दिल्ली में धान की खेती केवल उन्हीं चुनिंदा ग्रामीण इलाकों में संभव हो पाती है, जहां सिंचाई के लिए पानी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है। यमुना नदी के किनारे बसे खादर क्षेत्र के गांव तिग्गीपुर, अलीपुर, बख्तावरपुर, झंगोला, हमीदपुर और नजफगढ़ नाले के इर्द-गिर्द बसे गांवों जैसे ढांसा, झटीकरा, कांगनहेड़ी, नानकहेड़ी, दौराला, रावता,
दिल्ली देहात की कृषि व्यवस्था एक खास जल संसाधन ढांचे पर
सारंगपुर, झुलझुली, घुम्मनहेड़ा, शिकारपुर में धान की अच्छी खेती होती है। इसके विपरीत, खारे पानी वाले इलाकों नजफगढ़, कंझावला, अलीपुर बवाना, नरेला में किसानों ने हाल ही में सरसों की बुवाई की थी। वर्षा होने से सरसों के बीच सड़ सकते हैं। जिन किसानों के खेतों में छोटे पौधे निकल आए थे, उनको भी काफी नुकसान पहुंचा है। किसान कि धान की फसल बिल्कुल पक चुकी थी और अगले दो-तीन दिन में कटाई शुरू होनी थी, लेकिन अचानक हुई वर्षा ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है। सरकार जल्द मुआवजा दे
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