बस लोहे का पुराना पुल नहीं…स्वतंत्रता संग्राम का था गवाह, 150 साल बाद गंगा नदी में समाया

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930  
September 8, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

बस लोहे का पुराना पुल नहीं…स्वतंत्रता संग्राम का था गवाह, 150 साल बाद गंगा नदी में समाया

मानसी शर्मा /- उत्तर प्रदेश के कानपुर में मंगलवार सुबह ऐतिहासिक गंगा पुल का एक हिस्सा गिरकर गंगा नदी में समा गया। यह पुल 150साल से ज्यादा पुराना था और स्वतंत्रता संग्राम का अहम गवाह भी रहा है। हालांकि, प्रशासन ने चार साल पहले इसे यातायात के लिए बंद कर दिया था, फिर भी इसका गिरना शहरवासियों के लिए एक बड़ा सदमा बनकर सामने आया है।

नगर निगम कर रहा था इसका संरक्षण

गंगा पुल का ऐतिहासिक महत्व अत्यधिक था और नगर निगम इसका संरक्षण कर रहा था। इसके सौंदर्यीकरण के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे, ताकि इसे धरोहर के रूप में संरक्षित किया जा सके। हालांकि, मंगलवार सुबह पुल का लगभग 80फीट हिस्सा ढहकर गंगा नदी में गिर गया। प्रशासन ने पुल की जर्जर स्थिति को देखते हुए चार साल पहले इसे यातायात के लिए बंद कर दिया था।

स्वतंत्रता संग्राम का गवाह बना गंगा पुल

गंगा पुल का ऐतिहासिक महत्व सिर्फ इसकी उम्र तक सीमित नहीं था। यह पुल अंग्रेजों के समय में कानपुर को लखनऊ से जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग था। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस पुल से क्रांतिकारियों पर अंग्रेजों ने गोलीबारी की थी। यह पुल कानपुर और शुक्लागंज के बीच का अहम संपर्क मार्ग था। पुल के गिरने के बाद, उन्नाव के शुक्लागंज क्षेत्र की करीब 10लाख आबादी पर असर पड़ा है, जो इस पुल से सीधे जुड़ी हुई थी।

कानपुर आईआईटी द्वारा गंगा पुल की हालिया जांच में यह पाया गया था कि पुल अब खतरनाक हो चुका था और इसके गिरने का खतरा था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि पुल के पिलर्स में दरारें आ गई थीं। इसके बाद प्रशासन ने चार साल पहले इसे यातायात के लिए बंद कर दिया था।

गंगा पुल का ऐतिहासिक निर्माण

गंगा पुल का निर्माण 1875 में ब्रिटिश शासन के दौरान हुआ था। यह पुल कानपुर को उन्नाव और लखनऊ से जोड़ता था। ईस्ट इंडिया कंपनी के इंजीनियरों द्वारा बनाए गए इस पुल को 7 साल 4 महीने में पूरा किया गया था। यह पुल हर दिन लगभग 22,000 वाहनों और 1.25 लाख लोगों का यातायात संभालता था। गंगा पुल का गिरना कानपुरवासियों के लिए एक बड़ी क्षति है, क्योंकि अपने समय में ये पुल शहर के लिए एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग था।

About Post Author

Subscribe to get news in your inbox