बच्चों की पढ़ाई को लेकर दिल्ली सरकार ने एमसीडी पर लगाया बड़ा आरोप

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बच्चों की पढ़ाई को लेकर दिल्ली सरकार ने एमसीडी पर लगाया बड़ा आरोप

-कहा-भाजपा नित एमसीडी के स्कूलों में पढ़ने वाले 7 लाख बच्चों को नही मिली किताबे, कैसे करेंगे पढ़ाई ?

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- दिल्ली को लेकर आम आदमी पार्टी व भाजपा में तनातनी कोई नई बात नही है। हर योजना व हर मुद्दे को लेकर दोनो पार्टियों में खींचतान तो चलती ही रहती है। हाल ही में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के एमसीडी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई को लेकर एक बार फिर खींचतान शुरू हो गई हैं। आम आदमी पार्टी  ने भाजपा नित एमसीडी पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि एमसीडी ने अभी तक एमसीडी स्कूलों में पढ़ने वाले 7 लाख बच्चों को किताबें नही दे पाई है जिसकारण बच्चों की पढ़ाई रूक गई है। आम आदमी पार्टी ने एमसीडी पर बच्चों का भविष्य खराब करने का भी आरोप लगाया है।
                         भाजपा नित नगर निगम के स्कूलों में बच्चों को किताबें नहीं मिलने पर आम आदमी पार्टी ने सवाल खड़े किए हैं. आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता व एमसीडी प्रभारी दुर्गेश पाठक ने भाजपा पर एमसीडी के स्कूलों में पढ़ने वाले 7 लाख छात्रों का भविष्य खराब करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में पढ़ाई की स्थिति पहले ही खराब रही है। ऊपर से भाजपा की एमसीडी बच्चों को किताबें मुहैया नहीं कर रही है।
                     भाजपा पिछले 5 सालों से किताबें मुहैया करने में महीनों का वक्त लेती रही है। आम आदमी पार्टी ने भाजपा से किताबें खरीदने की प्रक्रिया को अगले 15 से 20 दिनों के अंदर पूरा करने की मांग की है। दुर्गेश पाठक ने कहा कि भाजपा पहले ही छात्रों के कई सत्र खराब कर चुकी है। अभी भी आपके पास मौका है कि बच्चों का भविष्य खराब न हो। पाठक ने कहा कि ऐसे तो कोरोना काल में हर वर्ग प्रभावित हुआ है लेकिन जो सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। वह बच्चों की पढ़ाई है। बच्चों की पढ़ाई के लिए पिछले एक-डेढ़ साल से ऑनलाइन क्लासेज चल रही हैं। सरकारें कोशिश कर रही हैं कि किसी भी तरह से बच्चों का भविष्य न खराब हो. लेकिन दुर्भाग्य है कि, आप सभी को पता होगा कि दिल्ली में एमसीडी के 1625 स्कूल हैं जिसमें लगभग 7 लाख बच्चे पढ़ते हैं। इन 7 लाख बच्चों का भविष्य अंधकार में है क्योंकि पढ़ाई का स्तर खराब है। ऑनलाइन पढ़ाई होने के बावजूद स्थिति खराब हो गई है।
                     उन्होंने कहा कि 2020 के सत्र में 9 महीनों बाद बच्चों को किताबें मिली. ये किताबें अप्रैल में मिलनी चाहिए थीं लेकिन दिसंबर-जनवरी में जाकर मिलीं. इसी प्रकार से 2019 में लगभग 8 महीने की देरी के साथ किताबें मिली. खासकर नॉर्थ एमसीडी का तो बहुत बुरा हाल है। पिछले 5 सालों से, बच्चे स्कूल में हों या ऑनलाइन क्लास में हों लेकिन उनके पास किताबें नहीं होती हैं. ऐसे 7 लाख बच्चों का भविष्य आज अंधकार में हैं।

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