फर्जी गोद लेने का गिरोह बेनकाब!

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31  
August 4, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

-दिल्ली पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी रैकेट का किया खुलासा -दंपतियों को बच्चे गोद दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी, दो आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली/सिमरन मोरया/-  दिल्ली पुलिस की साइबर थाना (उत्तर जिला) टीम ने बच्चों को कानूनी रूप से गोद दिलाने का झांसा देकर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के बरेली से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक दस्तावेज, डेबिट कार्ड, फर्जी अस्पताल और डॉक्टरों की मुहरें सहित कई आपत्तिजनक सामान बरामद किए गए हैं।

पुलिस के अनुसार, कार्रवाई की शुरुआत बुराड़ी निवासी 30 वर्षीय महिला की शिकायत के बाद हुई। महिला ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई थी कि उसे बच्चे को गोद दिलाने के नाम पर 1.37 लाख रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया।

ऑनलाइन मिला नंबर, फिर शुरू हुई ठगी
जांच में सामने आया कि महिला इंटरनेट पर गोद लेने की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी तलाश रही थी। इसी दौरान उसे एक मोबाइल नंबर मिला। संपर्क करने पर सामने वाले व्यक्ति ने अपना नाम सचिन अग्रवाल बताया और खुद को एक संस्था का प्रतिनिधि बताते हुए कानूनी तरीके से बच्चे को गोद दिलाने का दावा किया।

कुछ दिनों बाद आरोपी ने महिला को बताया कि एक नवजात लड़का गोद लेने के लिए उपलब्ध है। इसके बाद उसने रजिस्ट्रेशन फीस, बुकिंग चार्ज, ट्रांसपोर्टेशन और अन्य खर्चों के नाम पर कई बार पैसे जमा करवाए। भरोसा जीतने के लिए आरोपी ने कथित एनजीओ की फर्जी रसीदें, अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज भी भेजे।

जब महिला ने बच्चे की जैविक मां से मिलने की इच्छा जताई, तो आरोपी ने संस्था की नीति का हवाला देकर मना कर दिया और भरोसा दिलाया कि बच्चे के जन्म के बाद मुलाकात कराई जाएगी। बाद में परिवहन खर्च के नाम पर भी अतिरिक्त रकम मांगी गई। पैसे मिलने के बाद आरोपी ने फोन बंद कर लिया और संपर्क समाप्त कर दिया।

तकनीकी जांच से पुलिस तक पहुंचे आरोपी
मामले की जांच के लिए साइबर थाना उत्तर जिला की विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस ने करीब 100 मोबाइल नंबरों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), IMEI और बैंक खातों की तकनीकी जांच की। लगातार निगरानी और मनी ट्रेल की जांच के बाद आरोपियों का सुराग उत्तर प्रदेश के बरेली में मिला।

कई दिनों तक निगरानी और छापेमारी के बाद 31 जुलाई 2026 को पुलिस ने 46 वर्षीय सचिन अग्रवाल और 52 वर्षीय राकेश कुमार उर्फ डॉ. आर.के. को गिरफ्तार कर लिया।

फर्जी दस्तावेजों से रचते थे विश्वास का जाल
पूछताछ में खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी सचिन अग्रवाल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपना मोबाइल नंबर डालकर खुद को बच्चों को कानूनी रूप से गोद दिलाने वाली संस्था का प्रतिनिधि बताता था। वह पीड़ितों से रजिस्ट्रेशन, बुकिंग, ट्रांसपोर्टेशन और अन्य काल्पनिक शुल्क के नाम पर पैसे वसूलता था।

जांच में यह भी सामने आया कि सह-आरोपी राकेश कुमार, जो पेशे से फिजियोथेरेपिस्ट है, फर्जी एनजीओ रसीदें, नकली अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट और अन्य मेडिकल दस्तावेज तैयार कर गिरोह की मदद करता था, ताकि लोगों को गोद लेने की प्रक्रिया असली लगे।

क्या-क्या हुआ बरामद
पुलिस ने आरोपियों के पास से 2 मोबाइल फोन, 5 सिम कार्ड, 1 बैंक पासबुक, 6 डेबिट कार्ड, 2 पैन कार्ड तथा अस्पतालों और डॉक्टरों की 14 फर्जी मुहरें बरामद की हैं। इनका इस्तेमाल कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने में किया जाता था।

जांच जारी
दिल्ली पुलिस के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है। पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस रैकेट ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि बच्चे गोद लेने की प्रक्रिया केवल अधिकृत सरकारी संस्थाओं और कानूनी माध्यमों से ही पूरी करें तथा किसी भी ऑनलाइन या निजी दावे पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें।

About Post Author

Subscribe to get news in your inbox