प्रेम पच्चीसा,,,( भाग 4 )

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हर ख़बर पर हमारी पकड़

प्रेम पच्चीसा,,,( भाग 4 )

बिलासपुर, छत्तीसगढ़/-   रोहन,  कवि, अपनी कविताओं के दम पर शहर में ख्याति प्राप्त कर चुका था। उसकी रचनाएँ लोगों के दिलों को छूती थीं और उसका सपना था कि वह एक दिन इतना बड़ा कवि बने कि उसकी कविताएँ हर घर में गूँजें। आज उसका सपना पूरा हो गया।  साथ ही  दीपा को भूल कर  रोहन  दिल माया पर आ गया था जो एक साधारण-सी लेकिन संवेदनशील घरेलू लड़की थी। माया को रोहन की कविताएँ बहुत पसंद थीं और वह अक्सर उसकी काव्य सभाओं में चुपके से आकर कोने में बैठकर सुनती थी। रोहन की आँखें हर महफ़िल माया को ही खोजतीं ।

रोहन ने ठान लिया था कि वह माया से शादी करेगा लेकिन इसके लिए उसे अपने  करियर / भविष्य को और ऊँचाइयों तक ले जाना  होगा। उसने दिन-रात मेहनत की  और रोहन का दूसरा कविता संग्रह  #मुक्ताकाश प्रकाशित  होने पर, राष्ट्रीय  हिन्दी  सम्मेलन में महामहिम राज्यपाल के कर कमलों से  राजधानी में विमोचित हुआ..,जिस से  रोहन  नाम  समाचार पत्रों और सोशल मीडिया पर देशभर में फैल गया। एक दिन, शाम को   रवींद्र भवन  में भव्य काव्य सभा के बाद, उसने माया के सामने अपने दिल की बात रखी। माया,  हमेशा से रोहन की सादगी और ज़ुनून की कायल थी  ने  तत्काल हाँ कह दी। माया इसी पल का बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी।  दोनों की शादी एक सादे लेकिन ख़ूबसूरत समारोह में हुई, जहाँ रोहन ने मित्रों को प्रीति भोज खिला कर माया  की सादगी और ख़ूबसूरती को लेकर  लिखी एक खास कविता पढ़ी, जिसे  सभी को भावुक हुए और माया की आँखों में प्रेम जल छलछला आया ।

उधर, दीपा की ज़िंदगी एक अलग मोड़ पर किंकर्तव्य-विमूढ़  खड़ी  थी। रमेश के साथ उसकी शादी शुरू से ही तनावपूर्ण रही थी। रमेश का स्वभाव दीपा की स्वतंत्र आत्मा को रेशमी धागों से बाँधने वाला था। दीपा,  एक स्वतंत्र विचारों वाली महिला थी  ने आख़िरकार फैसला किया कि वह इस  दिखावटी रिश्ते को और नहीं निभा सकती। बिना अपने घर वालों और दोस्तों को  बताएं , रमेश से तलाक  ले लिया  साथ  ही दीपा ने  ज़िन्दगी भर  अकेले रहने का फ़ैसला किया। उसने एक छोटा-सा घर किराए पर लिया और अपनी ज़िंदगी को नए सिरे से एक प्राइवेट  स्कूल में शिक्षक बनकर  ज़ीना शुरू किया। यूं तो, दीपा को लिखने का शौक था और वह  कभी स्वतंत्र पत्रकार भी रही थी, अपनी भावनाओं  और बीती ज़िंदगी के उतार – चढ़ाव को डायरी में उतारने लगी। धीरे-धीरे, उसकी डायरी के पन्ने एक कहानी का रूप लेने लगे। कहानी के  हर पन्ने पर रोहन का  हसीं  चेहरा  दीपा फ़ील करती थी ।

एक दिन, रोहन  की काव्य  गोष्ठी में  दीपा की मुलाक़ात माया से रोहन ने करवाई ,माया अब रोहन की पत्नी थी। धीरे -धीरे दोनों की दोस्ती गहरी हो गई। माया ने दीपा को रोहन की काव्य गोष्ठी में आमंत्रित किया जहाँ दीपा की मुलाकात रोहन से दुबारा हुई। रोहन ने दीपा की डायरी पढ़ी और उसकी लेखन शैली से प्रभावित हुआ। उसने दीपा को प्रोत्साहित किया कि वह अपनी कहानियाँ प्रकाशित करे। दीपा  जो पहले अपनी काबिलियत पर शक करती थी, अब आत्मविश्वास से भर उठी।

समय के साथ, दीपा ने अपनी पहली किताब  #अनकहे रिश्ते प्रकाशित की जो एक आत्मकथात्मक उपन्यास था। उसकी किताब को लोगों ने खूब सराहा, और वह एक उभरती हुई लेखिका के रूप में जानी जाने लगी। दीपा ने अपनी आजादी को गले लगाया और फैसला किया कि वह अपनी जिंदगी अपनी शर्तों पर जिएगी। उधर, रोहन और माया एक-दूसरे के सहारे अपनी कला को और निखारते रहे।

राजेंद्र रंजन गायकवाड़ सेवानिवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक

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