नजफगढ़ के किसानों के लिए विधानसभा में उठी सर्किल रेट बढ़ाने की मांग

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

October 2026
MTWTFSS
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031 
October 8, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

नजफगढ़ के किसानों के लिए विधानसभा में उठी सर्किल रेट बढ़ाने की मांग

नई दिल्ली/सिमरन मोरया/-  दिल्ली के ग्रामीण इलाकों और खासतौर पर नजफगढ़ विधानसभा क्षेत्र के किसानों से जुड़े कृषि भूमि के सर्किल रेट का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। विधायक नीलम कृष्ण पहलवान ने दिल्ली विधानसभा में किसानों के हित में कृषि भूमि के सर्किल रेट को बढ़ाने की मांग रखी है।

विधायक के मुताबिक, दिल्ली में कृषि भूमि का सर्किल रेट पिछले करीब 18 वर्षों से संशोधित नहीं हुआ है। वर्तमान में यह दर करीब 53 लाख रुपये प्रति एकड़ बताई जाती है, जबकि मौजूदा बाजार कीमतों की तुलना में यह काफी कम है।

नीलम कृष्ण पहलवान का कहना है कि सर्किल रेट कम होने का सीधा असर उन किसानों पर पड़ता है, जिनकी जमीन सरकारी परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जाती है। ऐसी स्थिति में किसानों को उनकी पुश्तैनी जमीन का मौजूदा मूल्य के अनुरूप उचित मुआवजा मिलने में परेशानी होती है।

उन्होंने सरकार से मांग की है कि कृषि भूमि के सर्किल रेट को वर्तमान बाजार मूल्य को ध्यान में रखते हुए जल्द संशोधित किया जाए। साथ ही, जब तक नए सर्किल रेट लागू नहीं होते, तब तक कृषि भूमि के अधिग्रहण पर रोक रखने की मांग भी उठाई गई है।

विधायक ने कहा कि यह मुद्दा पहली बार नहीं उठाया गया है। जनवरी 2026 में भी उन्होंने विधानसभा में दिल्ली के गांवों की कृषि भूमि के सर्किल रेट को बढ़ाने और भूमि अधिग्रहण की स्थिति में किसानों को उचित और न्यायसंगत मुआवजा देने की मांग की थी।

नीलम कृष्ण पहलवान ने उम्मीद जताई कि दिल्ली सरकार किसानों की इस मांग पर संवेदनशीलता के साथ विचार करेगी और जल्द कोई ठोस फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण दिल्ली के किसानों को अपनी जमीन के उचित मूल्य और अधिकारों की सुरक्षा की उम्मीद है।

अब देखना होगा कि कृषि भूमि के सर्किल रेट में संशोधन को लेकर दिल्ली सरकार की ओर से आगे क्या कदम उठाया जाता है और किसानों की इस लंबे समय से चली आ रही मांग पर कब फैसला होता है।

About Post Author

Subscribe to get news in your inbox