प्रदुषण के चलते मानव स्वास्थ्य पर वन हेल्थ योजना अब जरूरी

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प्रदुषण के चलते मानव स्वास्थ्य पर वन हेल्थ योजना अब जरूरी

-देश वासियों को बीमारियों से बचाएगा वन हेल्थ, खर्च भी होगा कम
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/भावना शर्मा – दिल्ली में बढ़ते प्रदुषण से स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए पर्यावरण के साथ-साथ जीव व मानव स्वास्थ्य पर विशेषज्ञों ने जोर देने की बात कही है। विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विशेषज्ञों ने कहा कि जिस तरह से विकास के लिए मास्टर प्लान की जरूरत है ठीक उसी तरह स्वास्थ्य के लिए भी दिल्ली सरकार को अभी से आगामी नीतियों पर काम करना जरूरी है ताकि दिल्ली वासियों को बिमारियों से बचाया जा सके। उन्होने इसके लिए वन-हेल्थ की योजना पर काम करने की जरूरत पर जोर दिया है।
               दिल्ली को बीमारियों से बचाने के लिए वन हेल्थ पर काम करना जरूरी है। इससे न सिर्फ पर्यावरण, जीव और मानव के स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा बल्कि दिल्ली के प्रत्येक परिवार पर खर्च भी कम होगा। एक रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली में हर परिवार को सालाना अपनी कुल आय का 10 फीसदी हिस्सा सेहत पर खर्च करना पड़ रहा है जो औसतन 1.36 से 1.50 लाख रुपये के आसपास है।
              विश्व स्वास्थ्य दिवस स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि जिस तरह विकास के लिए मास्टर प्लान 2040 पर काम किया जा रहा है, उसी तरह स्वास्थ्य के लिए भी दिल्ली सरकार को अभी से नीतियों पर काम करना जरूरी है। सफदरजंग अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. जुगल किशोर का कहना है कि कोरोना महामारी और बीते कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन की वजह से अब न सिर्फ दिल्ली, बल्कि पूरे देश और विश्व स्तर पर वन हेल्थ के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है।
               उन्होंने कहा कि शहरी विकास को लेकर सरकारें भविष्य देख रही हैं। 18-20 साल आगे की नीतियों पर अभी से काम किया जा रहा है लेकिन स्वास्थ्य पर कोई चर्चा तक नहीं करता। कोरोना महामारी की वजह से काफी हद तक सरकारों को इसकी अहमियत समझ आई है लेकिन बीमारियों की रोकथाम पर संजीदा कोई नहीं है।  
              अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. संजय राय का कहना है कि इस समय बीमारियों के प्रति लोगों में जागरुकता जरूरी है। क्योंकि दुनिया में हर साल पर्यावरण से जुड़े कारणों की वजह से 13 करोड़ से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है।
               लंग्स केयर फाउंडेशन से जुड़े वरिष्ठ डॉ. अरविंद कुमार का कहना है कि अकेले वायु प्रदूषण से ही दुनिया भर में 70 लाख से अधिक मौते हो रही हैं। इनमें से 24 लाख मौतें हर साल दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में होती हैं जिसमें भारत भी शामिल है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली वायु प्रदूषण को लेकर विश्व में सबसे गंभीर शहरों में से एक है। अकेले वायु प्रदूषण ही दिल्ली के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन रहा है।

ये 5 बीमारियां हैं गंभीर
डायरिया, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, तपेदिक और टाइफाइड ये पांच संवेदनशील रोग पिछले पांच साल के दौरान सरकारी अस्पतालों में सबसे अधिक रिपोर्ट हुए।

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