पुरी में जगन्नाथ मंदिर कॉरिडोर का उद्घाटन, परियोजना पर 3200 करोड़ रुपये होंगे खर्च

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पुरी में जगन्नाथ मंदिर कॉरिडोर का उद्घाटन, परियोजना पर 3200 करोड़ रुपये होंगे खर्च

-अयोध्या के बाद अब पुरी की बदलेगी सूरत, खुलेंगे विकास के नये द्वार

नई दिल्ली/पुरी/शिव कुमार यादव/- अयोध्या में भगवान श्रीराम के प्राण प्रतिष्ठा समारोह की तैयारियां पूरे जोर-शोर से चल रही हैं। वहीं अब पुरी के प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ मंदिर को लेकर भी एक भव्य योजना का बुधवार को उद्घाटन किया गया है। इस परियोजना के तहत जगन्नाथ मंदिर हेरिटेज कॉरिडोर का निर्माण किया जायेगा जिस पर करीब 3200 करोड़ रूपये खर्च होने का अनुमान है।

आइए जानते हैं जगन्नाथ मंदिर में किस परियोजना का उद्घाटन होना है? यह परियोजना कब शुरू हुई थी? इसकी लागत क्या है? परियोजना से क्या बदलेगा?
जगन्नाथ मंदिर में किस परियोजना का उद्घाटन होना है?
ओडिशा में पुरी जिले में स्थित जगन्नाथ धाम के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए यहां हेरिटेज कॉरिडोर विकसित किया गया है। इस परियोजना को श्रीमंदिर परिक्रमा प्रकल्प (एसपीपी) नाम भी दिया गया है। आज यानी बुधवार को श्री जगन्नाथ मंदिर हेरिटेज कॉरिडोर परियोजना का उद्घाटन किया गया। सरकार ने उद्घाटन के लिए चार शंकराचार्यों के साथ भारत और नेपाल के 1,000 मंदिरों के धार्मिक प्रमुखों को आमंत्रित किया था। राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक परियोजना को श्रद्धालुओं को समर्पित किया।

खास बात यह है कि इसके ठीक पांच दिन बाद अयोध्या के नवनिर्मित मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। जगन्नाथ मंदिर चार प्रमुख धामों में से एक है। महाप्रभु श्री जगन्नाथ, बहन देवी सुभद्रा और बड़े भाई महाप्रभु बलभद्र की पूजा पुरी में की जाती है। जगन्नाथ मंदिर की चारदीवारी के 75 मीटर के कॉरिडोर के भीतर के क्षेत्र को विकसित किया गया है।

यह परियोजना कब शुरू हुई थी? इसकी लागत क्या है?
अक्तूबर 2019 में परियोजना को ओडिशा कैबिनेट से हरी झंडी मिली थी। नवंबर 2019 में इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण किया गया, जबकि इसका काम पिछले महीने ही पूरा हुआ है। 3200 करोड़ की इस परियोजना को कई भागों में बांटा गया था। अकेले श्री जगन्नाथ हेरिटेज कॉरिडोर के लिए 800 करोड़ रुपये आबंटित किए गए। इसके अलावा परियोजना में श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन भवन का पुनर्विकास, 600 लोगों की क्षमता वाला श्री मंदिर स्वागत केंद्र, जगन्नाथ सांस्कृतिक केंद्र, बदडांडा हेरीटेज स्ट्रीट स्केप, समुद्र तट विकास, पुरी झील और मूसा नदी पुनरुद्धार योजना समेत कई काम शामिल हैं।

राज्य सरकार ने पुरी के अंदर यातायात की भीड़ से बचने के उद्देश्य से पर्यटकों को सीधी पहुंच प्रदान करने के लिए 200 करोड़ रुपये की लागत से 2.3 किमी लंबे 4-लेन श्री सेतु (ट्रम्पेट ब्रिज) का निर्माण कराया है। इसके अतिरिक्त, 90 करोड़ रुपये की लागत वाली 630 मीटर लंबी सड़क (श्री डांडा) भी बनाई गई है।

परियोजना में और क्या बनाया गया है?
7-मीटर ग्रीन बफर जोन
10-मीटर अंतर (आंतरिक) प्रदक्षिणा
14-मीटर लैंडस्केप जोन
8-मीटर बाह्य (बाहरी) प्रदक्षिणा
10 मीटर का सार्वजनिक सुविधा क्षेत्र
4.5 मीटर सर्विस लेन

हेरिटेज कॉरिडोर में तमाम सुख-सुविधाएं मुहैया कराने के लिए कई निर्माण किए गए हैं, जैसे
मुख्य वस्त्र कक्ष
मिनी क्लोक रूम
सूचना सह दान कियोस्क
श्री जगन्नाथ रिसेप्शन सेंटर (एसजेआरसी)
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) कार्यालय
आश्रय मंडप
शौचालय
पुलिस सेवा केंद्र
एटीएम कियोस्क
विद्युत कक्ष
प्राथमिक चिकित्सा केंद्र

परियोजना से क्या बदलेगा?
श्रीमंदिर परिक्रमा प्रकल्प परियोजना के जरिए पुरी शहर को एक नया रूप दिया गया है। हेरिटेज कॉरिडोर को एक बड़े खुले स्थान में बनाया गया है, क्योंकि रथ यात्रा सहित मंदिर के कई त्योहार यहीं से शुरू होते हैं। इससे श्रद्धालुओं का बड़ा जमावड़ा सुरक्षित माहौल में हो सकेगा।
          75 मीटर के श्री जगन्नाथ हेरिटेज कॉरिडोर (एसजेएचसी) के भीतर मौजूद मठ मंदिरों के पुनर्विकास कार्य किए गए हैं। इन मठ मंदिरों का पुनर्विकास संबंधित मठ की सामान्य और विशिष्ट परंपराओं में वास्तुकला की कलिंगन शैली को ध्यान में रखकर किया गया है। पुजारी और श्रद्धालु बताते हैं कि पहले शहर में बहुत सारी दुकानें थीं और परिक्रमा के दौरान उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ता था। अब इलाके को साफ कर दिया गया है। मंदिर की सुंदरता बढ़ गई है।
           पवित्र धाम का कई बार दौरा कर चुके दिल्ली निवासी रवि कहते हैं, ’रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या बढ़कर लाखों में पहुंच जाती है। पहले रास्ता बहुत संकरा था, लेकिन अब लोग आसानी से प्रभु से प्रार्थना कर पाएंगे।’ अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल रथ यात्रा में करीब 17 लाख लोगों ने हिस्सा लिया था।  

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