पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव पर प्रधानमंत्री की अपील              

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October 16, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

-संवाद और कूटनीति को बताया एकमात्र रास्ता -क्षेत्रीय हालात पर जताई गहरी चिंता

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-  पश्चिमी एशिया में जारी अस्थिरता के बीच नरेंद्र मोदी ने मौजूदा परिस्थितियों को गंभीर और चिंताजनक बताया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी प्रकार के टकराव से स्थिति और बिगड़ सकती है, इसलिए सभी संबंधित पक्षों को संयम बरतते हुए बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशना चाहिए। प्रधानमंत्री ने दोहराया कि भारत सदैव शांति, स्थिरता और कूटनीतिक प्रयासों का समर्थक रहा है।

सैन्य टकराव से वैश्विक असर की आशंका
प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में यह भी संकेत दिया कि यदि क्षेत्र में संघर्ष बढ़ता है तो उसका प्रभाव केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संतुलन पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि संवाद की प्रक्रिया ही दीर्घकालिक शांति का आधार बन सकती है और यही मार्ग सभी के हित में है।

विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा पर जोर
प्रधानमंत्री ने विदेशों में निवास कर रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार हालात पर लगातार निगरानी बनाए हुए है और आवश्यकता पड़ने पर आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार है। साथ ही यह भी कहा कि भारत विभिन्न देशों के साथ संपर्क में है ताकि किसी भी आपात स्थिति में भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

कनाडा के साथ परमाणु सहयोग पर चर्चा
द्विपक्षीय वार्ता के दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री के साथ हुई मुलाकात का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि दोनों देशों के बीच यूरेनियम आपूर्ति और नागरिक परमाणु ऊर्जा सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण सहमति बनी है। छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के क्षेत्र में संयुक्त कार्य की दिशा में भी प्रगति की बात सामने आई है, जिससे ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को नई गति मिल सकती है।

शांति और संतुलन की दिशा में भारत की भूमिका
प्रधानमंत्री के बयान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर संतुलित और जिम्मेदार रुख के रूप में देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि भारत की यह अपील क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण संदेश है। आने वाले दिनों में वैश्विक कूटनीति की दिशा और भी स्पष्ट हो सकती है।

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