पंजाब की राजनीति में डेरों की खास अहमीयत, राम रहीम का डेरा इस बार किसका करेगा समर्थन?

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पंजाब की राजनीति में डेरों की खास अहमीयत, राम रहीम का डेरा इस बार किसका करेगा समर्थन?

-गुरुग्राम के डेरे में मंथन, 48 घंटे में तय हो सकता है कि पंजाब में भक्तों का वोट किधर जाएगा, 69 सीटों पर सीधा असर

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- रोहतक की सुनारिया जेल से 21 दिन की फरलो पर छूटे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम फिलहाल गुरूग्राम के सेक्टर 50 के अपने डेरे में मौजूद है। हत्या और बलात्कार के सिलसिले में उम्र कैद काट रहे बाबा के जेल से बाहर आने को पंजाब चुनाव से भी जोड़ कर देखा जा रहा है। जिसके तहत डेरे में इस बार किस पार्टी को समर्थन देना इस पर चर्चा चल रही है। वैसे भी पंजाब में डेरा सच्चा सौदा का 69 सीटों पर सीधा प्रभाव है।
               सूत्रों की मानें तो डेरे की 45 सदस्यीय कमेटी बाबा के लगातार टच में है, जो अगले 48 घंटे में रिपोर्ट सौंप सकती है। इसके बाद संगत, यानी अनुयायियों को यह निर्देश जारी किया जाएगा कि चुनाव को लेकर बाबा का इशारा किस पार्टी की ओर है। डेरे का पंजाब के मालवा रीजन की करीब 69 सीटों पर प्रभाव है।
                पंजाब चुनाव में सिर्फ 10 दिन बचे हैं, जिसके चलते डेरे में गहमागहमी बढ़ी हुई है। लाखों अनुयायियों वाला डेरा चुनाव में बड़ा उलटफेर करने की हैसियत रखता है। पिछले चुनाव में भी अंतिम समय पर डेरा समर्थकों ने बीजेपी का समर्थन किया था और अकाली-बीजेपी गठबंधन को लाभ हुआ था। उस समय आम आदमी पार्टी यह सोच कर चल रही थी कि मालवा में उन्हें अच्छी बढ़त मिलेगी, लेकिन अंत में आम आदमी पार्टी का गणित गड़बड़ा गया और पंजाब में कांग्रेस सत्ता के सिंहासन तक पहुंच गई।
                राम रहीम की सुरक्षा में उसके प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड के साथ-साथ हरियाणा पुलिस भी तैनात है। यहां आने-जाने वाले की पूरी जांच पड़ताल की जा रही है। प्रशासन के मुताबिक पैरोल का पूरा समय बाबा को इसी डेरे पर गुजारना होगा, क्योंकि पैरोल की अर्जी में यहीं का पता दर्ज है। प्रशासन ने ये भी साफ कर दिया है कि इस डेरे के अलावा राम रहीम किसी और डेरे पर नहीं जा सकेगा।
                 जिस चर्चा घर में बाबा राम रहीम को रखा गया है, उसके चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। मेन गेट से लेकर मेन रोड तक सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। छत पर बड़े-बड़े पर्दे लगाकर डेरे को चारों तरफ से कवर कर दिया गया है। सेक्टर 50 के डेरे में हर घंटे किसी न किसी वीआईपी का आना जारी है। काफिले की गाड़ियों के शीशों पर काली फिल्म चढ़ी हुई है। इससे ये अंदाजा लगाना मुश्किल है कि कौन बाबा से मिलने आ रहा है।
                  गेट पर किसी को ज्यादा देर तक रुकने नहीं दिया जा रहा है और गेट पर मौजूद पुलिसकर्मी लोगों पर पूरी निगाह रखे हुए हैं। इसके अलावा खुफिया तंत्र भी सक्रिय है। हरियाणा पुलिस के 40 से 50 जवान डेरे पर हर समय मौजूद हैं।
                  यहां बता दें कि डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरु गुरुमीत राम रहीम भले ही 2017 से हरियाणा की सुनारिया जेल में सजा काट रहा हो, लेकिन इन भक्तों की अपने गुरु के प्रति आस्था में कोई कमी नहीं दिखती है। पंजाब में चुनाव के ठीक पहले एक महीने के अंदर डेरा सच्चा सौदा ने दो बड़ी सभाएं कीं, जिसमें लाखों लोगों की भीड़ जुटी। इस सभा को डेरा ‘नाम चर्चा’ कहता है।
               9 जनवरी को पंजाब के बठिंडा जिले के सलाबतपुरा में डेरे के दूसरे गुरु शाह सतनाम सिंह का जन्मदिन उत्सव मनाया गया। डेरा दावा करता है कि इस दिन सिर्फ इसी डेरे में 25 लाख लोग पहुंचे। फिर 25 जनवरी को डेरा सच्चा सौदा के हेडक्वार्टर्स सिरसा में पंजाब और हरियाणा के डेरा फॉलोअर्स गुरु शाह सतनाम सिंह का 103वां जन्मदिन मनाने के लिए जुटे।
                 भले ही ऊपर से देखने पर ये दोनों सभाएं धार्मिक आयोजन लगते हों, लेकिन चुनाव के ठीक पहले ये डेरा का शक्ति प्रदर्शन है। जानकार कहते हैं कि 2017 में राम रहीम के जेल जाने के बाद से ये अब तक का सबसे बड़ा आयोजन है और पंजाब चुनाव के पहले ये होना सभी राजनीतिक पार्टियों के लिए संकेत है कि अगर पार्टियों ने डेरा को नजरंदाज किया गया तो उन्हें चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
                पंजाब में करीब 10 हजार डेरे हैं और राजनीतिक इतिहास में डेरा सच्चा सौदा ने ही सबसे ज्यादा खुलकर राजनीति में भाग लिया है। डेरा खुलकर चुनावों में पार्टियों और उम्मीदवारों से साथ खड़ा रह चुका है। इसलिए ये डेरा सबसे ज्यादा चर्चित और विवादित भी रहा है। यहां के लोग बताते हैं कि हमने 2007, 2012 में भी डेरे के आदेश पर एक बार कांग्रेस को और दूसरी बार अकाली दल को वोट दिया था।
                डेरों पर रिसर्च वर्क करने वाले पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर आशुतोष कुमार कहते हैं, ’पंजाब में पावर स्ट्रक्चर सिर्फ एक ही तबके (जट सिखों) तक सीमित है। वहीं समाज के एक तबके (ैब् समुदाय) की सत्ता में भागीदारी न के बराबर होती है। ऐसे में राजनीतिक दलों के नेता डेरों के जरिए इस वर्ग के वोटर्स को टारगेट करते हैं।’
                 ’नेताओं को लगता है डेरे के गुरु के पास जाकर उनका विश्वास जीता जाए, ताकि उनके फॉलोअर्स भी पार्टी के सपोर्ट में वोट कर दें। डेरों का कम्युनिकेशन नेटवर्क बहुत व्यवस्थित होता है। ये पूरी तरह से संगठित होता है। अब तकनीकी के जमाने में एक व्हाट्सएप मैसेज से ही काम हो जाता है। डेरा सच्चा सौदा में पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी होती है। डेरे के गुरु तय कर देते हैं कि 

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