“नो गन, नो गैंग”, द्वारका एएटीएस ने गैंग सहयोगी को अवैध हथियारों सहित दबोचा

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August 18, 2026

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नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-    राजधानी में संगठित अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत Delhi Police की द्वारका जिला एंटी ऑटो थेफ्ट स्क्वॉड (एएटीएस) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए काला जठेड़ी–ओम प्रकाश उर्फ काला झरोड़िया गिरोह के एक सक्रिय सहयोगी को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से दो अर्ध-स्वचालित देसी पिस्तौल और पांच जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस का दावा है कि समय रहते की गई इस कार्रवाई से एक संभावित टारगेट किलिंग की साजिश नाकाम कर दी गई।

गुप्त सूचना पर बिछाया जाल
21 फरवरी 2026 को एएटीएस टीम को विशेष खुफिया इनपुट प्राप्त हुआ कि गिरोह से जुड़ा एक युवक द्वारका इलाके में अवैध हथियारों के साथ घूम रहा है और किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की तैयारी में है। सूचना मिलते ही पुलिस ने द्वारका नाला रोड, मेट्रो पिलर नंबर पी-9, हरि विहार के पास रणनीतिक घेराबंदी की।

कुछ ही देर में संदिग्ध युवक को पकड़ लिया गया। तलाशी के दौरान उसके पास से दो अत्याधुनिक अर्ध-स्वचालित पिस्तौल और पांच जीवित कारतूस बरामद हुए, जो पूरी तरह लोडेड अवस्था में थे।

आरोपी की पहचान और आपराधिक पृष्ठभूमि
गिरफ्तार युवक की पहचान मनीष उर्फ मिशु (19 वर्ष), निवासी झरोड़ा कलां, नई दिल्ली के रूप में हुई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वह पूर्व में भी शस्त्र अधिनियम के तहत गिरफ्तार हो चुका है। जनवरी 2026 में भी उसे एक मामले में पकड़ा गया था।

पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि जेल में रहते हुए उसने गैंगस्टर ओम प्रकाश उर्फ काला झरोड़िया से दोबारा संपर्क स्थापित किया और गिरोह के लिए शूटर के तौर पर काम करने को तैयार हो गया।

अंतरराज्यीय हथियार तस्करी नेटवर्क का खुलासा
सतत पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने लगभग 16-17 दिन पहले तीन पिस्तौल और करीब दस कारतूस खरीदे थे। इनमें से एक हथियार उसके हरियाणा के रोहतक निवासी साथी के पास है, जिसकी तलाश जारी है।

जांच में यह भी सामने आया कि ये हथियार मध्य प्रदेश के खरगोन जिले से अवैध रूप से मंगवाए गए थे। इस खुलासे के बाद पुलिस ने दिल्ली और मध्य प्रदेश के बीच सक्रिय अंतरराज्यीय अवैध हथियार आपूर्ति नेटवर्क की कड़ियों को खंगालना शुरू कर दिया है।

संगठित अपराध पर सख्त प्रहार
द्वारका जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में गठित विशेष टीम ने सुनियोजित तरीके से निगरानी, खुफिया सूचना संग्रह और तकनीकी विश्लेषण के जरिए इस ऑपरेशन को अंजाम दिया।

पुलिस का कहना है कि “नो गन, नो गैंग” अभियान के तहत संगठित अपराध और अवैध हथियारों के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की दिशा में यह बड़ी उपलब्धि है। सह-आरोपियों की तलाश जारी है और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

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