नीतीश सरकार को HC से झटका,आरक्षण का दायरा

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

October 2026
MTWTFSS
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031 
October 16, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

नीतीश सरकार को HC से झटका,आरक्षण का दायरा

-65 फीसदी तक बढ़ाने के आदेश किए रद्द

पटना/नई दिल्ली/अनिशा चौहान/ – बिहार सरकार को पटना हाईकोर्ट ने बड़ा झटका दे दिया है। दरअसल पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार के द्वारा आरक्षण बढ़ाने के फैसले को रद्द कर दिया है। गुरुवार के दिन कोर्ट ने बिहार के उस कानून को रद्द कर दिया, जिसमें पिछड़ा वर्ग,अत्यंत पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण 50 फीसदी से बढ़ाकर 65 फीसदी कर दिया गया था। इसका साफ मतलब है कि जाति आधारित आरक्षण लोगों को 65 फीसदी नहीं मिलेगी।

बता दें कि आरक्षण के मामले में गौरव कुमार सहित कुछ और याचिकाकर्ताओं ने याचिका दायर की थी। इस पर 11 मार्च को सुनवाई होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था, जिसे आज यानी की 20 जून को सुनाया गया है। जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ ने गौरव कुमार और अन्य याचिकाओं पर लंबी सुनवाई की थी। जिसके बाद अब कोर्ट का फैसला सामने आया और कोर्ट ने 65 फीसदी आरक्षण को रद्द कर दिया है।

अभी किसे कितना आरक्षण?

गौरतलब है कि देश में 49.5 %आरक्षण है। ओबीसी को 27%, एससी को 15% और एसटी को 7.5 %आरक्षण मिलता है। इसके अलावा आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग के लोगों को भी 10% आरक्षण मिलता है। इस हिसाब से आरक्षण की सीमा 50 फीसदी के पार जा चुकी है। हालांकि, नवंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग के लोगों को आरक्षण देने को सही ठहराया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ये कोटा संविधान के मूल ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचाता। बिहार में भी पहले आरक्षण की सीमा 50% ही थी।

बिहार में किसे कितनी नौकरियां

बिहार में सामान्य वर्ग की आबादी 15 प्रतिशत है और सबसे ज्यादा 6 लाख 41 हजार 281 लोगों के पास सरकारी नौकरियां है। नौकरी के मामले में दूसरे नंबर पर 63 फीसदी आबादी वाला पिछड़े वर्ग है। पिछड़ा वर्ग के पास कुल 6 लाख 21 हजार 481 नौकरियां हैं।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox