धोखाधड़ी मामले में 5 साल से फरार महिला अपराधी गिरफ्तार, फूड डिलीवरी ऐप से मिला सुराग

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धोखाधड़ी मामले में 5 साल से फरार महिला अपराधी गिरफ्तार, फूड डिलीवरी ऐप से मिला सुराग

-अदालत ने आरोपी सुमन को घोषित अपराधी घोषित किया था -एक ही संपत्ति दो बार बेचकर करोड़ों की ठगी का आरोप

नई दिल्ली/द्वारका/उमा सक्सेना/-  द्वारका ज़िले की एंटी-बर्गलरी सेल की टीम ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में 5 साल से फरार चल रही महिला अपराधी को गिरफ्तार किया है। अदालत द्वारा घोषित प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर (घोषित अपराधी) इस महिला का नाम सुमन (48), पत्नी स्व. हरि चंद, निवासी लक्ष्मी विहार, मोहन गार्डन, उत्तम नगर, दिल्ली है।

मामला और फरारी
सुमन पर आरोप है कि उसने forged (जाली) दस्तावेज़ों के आधार पर एक ही संपत्ति को दो बार बेचकर लोगों से करोड़ों की ठगी की। इस मामले में 2020 में नजफगढ़ थाने में FIR संख्या 937/2020, धारा 420/467/468/471 IPC दर्ज की गई थी। अदालत ने 20 फरवरी 2024 को उसे घोषित अपराधी घोषित कर दिया था।

ख़ास ऑपरेशन और सुराग
डीसीपी द्वारका, आईपीएस अंकित सिंह के निर्देश पर फरार अपराधियों की धरपकड़ के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा था। इंस्पेक्टर विवेक मैंडोला के नेतृत्व में बनाई गई विशेष टीम लगातार उसके ठिकानों की तलाश कर रही थी।

टीम ने उसका आधार कार्ड और नया मोबाइल नंबर खंगाला। जब लोकेशन से कोई ठोस जानकारी नहीं मिली, तो पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इसी दौरान खुलासा हुआ कि आरोपी एक फूड डिलीवरी ऐप का इस्तेमाल कर रही है। ऐप से मिले डेटा ने पुलिस को उसका सटीक पता मुहैया कराया।

छापा और गिरफ्तारी
पुलिस टीम ने मोहान गार्डन स्थित नए ठिकाने पर छापा मारकर सुमन को पकड़ लिया। मौके पर उसका आधार कार्ड मिलान कर पहचान पुख्ता की गई। इसके बाद उसे BNSS की धारा 35.1(D) के तहत गिरफ़्तार कर अदालत में पेश किया गया।

पूछताछ और खुलासे
पुलिस पूछताछ में सुमन ने बताया कि पति की मृत्यु के बाद चार बेटियों की ज़िम्मेदारी उसके कंधों पर आ गई। शुरू में उसने छोटे-मोटे काम किए, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते उसने गलत रास्ता चुन लिया। साल 2018 में उसने एक ही प्लॉट को अलग-अलग लोगों को बेच दिया। हालांकि उसने दस्तावेज़ों की जालसाजी से इनकार किया।

पहले से दर्ज मामले
FIR संख्या 98/2018, धारा 420/467/468/471 IPC, थाना नजफगढ़, दिल्ली।

महत्वपूर्ण उपलब्धि
इस गिरफ्तारी से न केवल एक पुराने और बड़े धोखाधड़ी मामले का पर्दाफाश हुआ है बल्कि यह भी साबित हुआ है कि तकनीक और पैनी जांच से कितने ही चालाक अपराधी भी क़ानून से नहीं बच सकते।

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