धर्म को लेकर राजनीति करना अनुचित, उसे सिर्फ धर्म की तरह ही देखें- एस.एन. सिंह

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धर्म को लेकर राजनीति करना अनुचित, उसे सिर्फ धर्म की तरह ही देखें- एस.एन. सिंह

-भाजपा प्रवक्ता ने कहा- भारत जैसे एक सहिष्णु देश में कट्टरता और अपने ही धर्म को सर्वश्रेष्ठ मानने से दिक्कत ही होगी
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/लखनऊ/शिव कुमार यादव/- भाजपा के प्रवक्ता एसएन सिंह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का तो नारा ही है सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास। हम लोग मत-मजहब देख कर कोई भी कार्य नहीं करते। हम सभी धर्मों के लिए बेहद पारदर्शी और ईमानदार तरीके से कानून लाते हैं। हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। लेकिन, कुछ लोग वोट की तुष्टिकरण के कारण एक धर्म का सम्मान करते हैं तो दूसरे धर्म का अपमान। ऐसे लोगों को मैं बताना चाहूंगा कि उनके ऐसे कार्यों से समाज में भारी द्वेष उत्पन्न होता है। भाईचारा समाप्त होता है। आप धर्म की राजनीति न करें। धर्म को सिर्फ धर्म की ही तरह देखिए।
                   यहां पत्रकारों से बातचीत में भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता एस.एन. सिंह ने कहा कि ईश्वर तो कण-कण में है। उसे अपने मन की बात सुनाने के लिए किसी लाउडस्पीकर की जरूरत नहीं है। अगर आप अपने मन की बात ईश्वर से कहना चाहते हैं तो आपका मन सच्चा होना चाहिए, पवित्र होना चाहिए। आप सच्चे और पवित्र मन से जो भी कहेंगे, ईश्वर सुन लेंगे। इसमें कोई शक नहीं है। उन्होंने कहा कि हम सब जानते और मानते है कि कोई भी मदहब हो, आपस में बैर रखना कतई नहीं सिखाता। हर मजहब यही कहता है कि हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, आपसे में है सब भाई-भाई। फिर मजहब के नाम पर इतनी लड़ाई क्यूँ? इतनी नफरत क्यूं।
                उन्होंने कहा कि अगर लोग लड़ रहे हैं तो इसके पीछे सिर्फ और सिर्फ एक ही कारण है- धर्म के प्रति कट्टर सोच और अपने ही धर्म को सर्वश्रेष्ठ मानने की भावना। इससे समरसता का लोप होता है और कट्टरता निरंतर बढ़ती है। भारत जैसे एक सहिष्णु देश में कट्टरता और अपने ही धर्म को सर्वश्रेष्ठ मानने से दिक्कत ही होगी। उस भावना को भड़काने के लिए, कट्टरता को और जगाने के लिए आग में घी का काम करते हैं कट्टरता का पाठ पढ़ाने वाले धर्मगुरु व कुछ देश विरोधी मानसिकता वाली राजनीतिक पार्टियां।
               एसएन सिंह ने कहा कि आज बहस इस बात पर छिड़ी है कि अजान के समय लाउडस्पीकर बजे या न बजे। मेरा सवाल है कि क्या लाउडस्पीकर अजान का अनिवार्य हिस्सा अथवा नहीं। मैं मानता हूं कि अगर हमारा मन सच्चा होगा, पवित्र होगा तो हम पाएंगे कि ईश्वर तो कण कण में है। वह  हमारे सबसे नज़दीक है। मुझे नहीं लगता कि ईश्वर तक अपनी बात पहुंचाने के लिए किसी लाउडस्पीकर की जरूरत होनी चाहिए। ईश्वर को सच्चे मन से याद करें, वह आपकी सुन लेंगे। ईश्वर को पाने के लिए इंसानों से प्रेम, इंसानों के लिए समर्पण व इंसानों को सम्मान देने की जरूरत है, न की लाउडस्पीकर की।

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