द्वारका कोर्ट में वकीलों ने किया पुलिस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

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October 25, 2026

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द्वारका कोर्ट में वकीलों ने किया पुलिस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

-बगैर बताये वकील पर कार्यवाही को लेकर वकीलों ने किया सांकेतिक प्रदर्शन, भारी पुलिस बल तैनात
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- वीरवार को द्वारका कोर्ट के वकीलों ने एक वकील को पुलिस द्वारा प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाते हुएं पुलिस के खिलाफ सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया। दो घंटे तक चले इस प्रदर्शन में सैकड़ों वकीलों ने हिस्सा लिया। जिला जज नरोत्तम कौशल के आग्रह पर वकीलों ने प्रदर्शन बंद कर दिया। लेकिन इसके पहले वकीलों ने जिला जज से द्वारका के पुलिस उपायुक्त को 28 फरवरी तक हटाने की अपील भी कर डाली। वकीलों ने यह भी चेतावनी दी कि अगर उनकी मांग नही मानी गई तो वे द्वारका कोर्ट से द्वारका पुलिस उपायुक्त कार्यालय तक  शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन करेंगे।
                 द्वारका कोर्ट बार एसोसिएशन के एडवोकेट उमेश यादव ने बताया कि बार एसोसिएशन के सदस्य व वकील पंकज चौधरी ने पास्को के केस में अपने मुलजिम की अंतरिम जमानत कराई थी। उस केस में शिकायत कर्ता युवती ने कोर्ट परिसर से निकलते ही 22 फरवरी को पुलिस में शिकायत कर दी कि वकील ने उन्हें गंदा इशारा किया। शिकायत वापस लेने के लिए कहा और शिकायत वापस नहीं लेने पर जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने बगैर किसी जांच पड़ताल के सीधे वकील के खिलाफ पास्को के तहत मामला दर्ज कर लिया और शाम को वकील को जांच के लिए बुला लिया। पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें रात को डेढ़ बजे छोड़ दिया लेकिन तड़के पांच बजे दो दर्जन पुलिसकर्मी पहुंच कर घर को घेर लिया। इसकी सूचना मिलने के साथ भारी संख्या में वकील भी पहुंच गए। मामला बिगड़ता देख पुलिस ने वकील को नोटिस देकर जांच में शामिल होने को कहा। इसी बीच वकील को पूर्वा सरीन की अदालत से अंतरित जमानत मिल गई। इसके बाद वकीलों ने 24 फरवरी शुक्रवार को पुलिसवालों के प्रताड़ना के विरोध में प्रदर्शन की योजना बनाकर बार एसोसिएशन के सूचना पट्ट पर चिपका दिया। पुलिस को जब प्रदर्शन का पता चला तो वकील पंकज चौधरी के घर पर दोबारा पहुंच गए।
                   इस संबंध में वकील मनोज भारद्वाज बताते हैं कि यह दिल्ली पुलिस का ही एक आर्डर है कि किसी भी वकील पर मामला चलाने के पहले बार एसोसिएशन से अनुमति ली जाए लेकिन ऐसा न कर पुलिस ने गलत काम किया। वकीलों की दलील है कि पुलिस उपायुक्त फिल्मों से प्रेरित है और फिल्मी अंदाज में कार्रवाई करने का प्रयास कर शांति भंग कर रहे हैं। इनमें पुलिस बल को संभालने की क्षमता नहीं हैं इसलिए इन्हें यहां से हटाया जाए। प्रदर्शन के दौरान सैंकड़ों पुलिसकर्मी मौजूद रहे।

क्या है पाक्सो एक्ट
कानून (पाक्सो एक्ट) लड़के और लड़की को समान रूप से सुरक्षा प्रदान करता है। इस एक्ट के तहत बच्चों को सेक्सुअल असाल्ट, सेक्सुअल हैरेसमेंट और पोर्नोग्राफी जैसे अपराधों से प्रोटेक्ट किया गया है। 2012 में बने इस कानून के तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा तय की गई है।

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