नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के शुरू होने से पहले ही नेम प्लेट वाला मामला अभी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा ही था कि उसमें सुनवाई के बाद एससी ने आदेश दिया कि दुकानदारों को अपनी दुकानों पर लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन लगाना होगा। इस आदेश पर यूपी सरकार के वकील का बयान भी सामने आया। उन्होंने कहा कि ‘दुकानों पर नेम प्लेट लगाने से किसी को भी दिक्कत नहीं होनी चाहिए।’


सुनवाई में एससी ने दिया आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कांवड़ यात्रा के रास्ते में आने वाले सभी होटलों और ढाबों के लिए आदेश जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि ‘दुकानदारों को लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन से जुड़े सभी निर्देशों का पालन करना होगा।’ कोर्ट ने क्यूआर कोड के मामले पर सुनवाई के दौरान आगे कहा कि ‘हम यह भी साफ करते हैं कि ‘इन मुद्दों पर फिलहाल विचार करने की नहीं सोच रहे हैं।

कोर्ट में उस मामले के तहत सुनवाई हुई, जिसमें दुकानदारों को अपनी दुकानों के आगे अपनी पहचान को उजागर करने के निर्देश दिए गए थे। उत्तर प्रदेश सरकार ने यह आदेश उन दुकानदारों के लिए जारी किया था, जिनकी दुकानें, ढाबे और रेस्टोरेंट कांवड़ यात्रा के मार्ग में आते हैं।
क्या है क्यूआर कोड और नेम प्लेट मामला?
उत्तर प्रदेश सरकार ने कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले दुकानदारों के लिए एक आदेश जारी किया। इस आदेश में दुकानदारों से अपनी दुकानों और ढाबों के आगे फत् कोड लगाने के लिए कहा गया। साथ ही दुकानदारों की पहचान के लिए उनके नाम भी लिखने को कहा गया। इस आदेश के जारी होने के बाद मामला गर्मा गया। इस मामले को दुकानदारों के अधिकारों और उनकी धार्मिक पहचान से जोड़ने की वजह से यह सियासी मुद्दा बन गया।

हालांकि, जब ये मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा, तो अब कोर्ट ने भी केवल लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की जानकारी देने का आदेश दिया है। नेम प्लेट और क्यूआर कोड के मामले पर एस ने दखल देने से मना कर दिया है।


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