नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल खड़े हो गए हैं। दलेलगढ़ गांव में पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिरने से तीन वर्षीय मासूम देवांश की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि गड्ढे के चारों ओर न तो कोई बैरिकेडिंग थी और न ही चेतावनी संकेत, जिससे यह स्थान लंबे समय से दुर्घटना को न्योता दे रहा था।
धार्मिक आयोजन के दौरान हुआ हादसा
मृतक देवांश अपनी मां के साथ गांव में आयोजित एक धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने आया था। समारोह के दौरान वह अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। इसी बीच खेलते-खेलते वह करीब छह से सात फीट गहरे पानी से भरे गड्ढे में गिर गया। कुछ समय तक जब वह नजर नहीं आया तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। बाद में गड्ढे में उसकी टोपी दिखाई दी, जिसके बाद ग्रामीणों ने पानी में उतरकर बच्चे को बाहर निकाला और तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
ग्रामीणों का आरोप, पहले भी दी थी शिकायत
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर हादसा हुआ, वह पशुचर भूमि है जहां से समय-समय पर मिट्टी निकाली जाती रही है। इससे वहां गहरा गड्ढा बन गया, जिसमें बरसात और नालियों का पानी भरता रहा। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों से गड्ढे की घेराबंदी कराने की मांग की थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
प्रशासन और प्राधिकरण की प्रतिक्रिया
घटना की सूचना मिलते ही तहसील और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। वहीं प्राधिकरण की ओर से बताया गया कि जिस खसरा संख्या की भूमि पर गड्ढा है, वह निजी स्वामित्व में है, इसलिए सीधे कार्रवाई करना संभव नहीं था। हालांकि मामले की जांच की बात कही गई है।
इस दर्दनाक घटना के बाद गांव में शोक की लहर है और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। लोगों ने प्रशासन से ऐसे खतरनाक स्थलों की तत्काल पहचान कर सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की त्रासदी दोबारा न हो।


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