क्यों लिखा जाता है घर के बाहर ‘शुभ-लाभ’?

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क्यों लिखा जाता है घर के बाहर ‘शुभ-लाभ’?

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-   हिंदू संस्कृति में हर प्रतीक और परंपरा के पीछे कोई न कोई आध्यात्मिक संदेश छिपा होता है। आपने अक्सर देखा होगा कि घरों के मुख्य द्वार पर ‘स्वास्तिक’ के साथ ‘शुभ-लाभ’ लिखा होता है। यह सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि सकारात्मकता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि ‘शुभ-लाभ’ का संबंध स्वयं भगवान गणेश से है, जो रिद्धि-सिद्धि के स्वामी और सुख-समृद्धि के दाता माने जाते हैं।

गणेशोत्सव से जुड़ा है शुभ-लाभ का पवित्र अर्थ
गणेशोत्सव का पर्व भक्ति और उल्लास का प्रतीक है, जो हर वर्ष गणेश चतुर्थी से आरंभ होकर अनंत चतुर्दशी तक चलता है। इन दस दिनों में भक्त भगवान गणेश की विशेष आराधना करते हैं। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता कहा गया है — हर शुभ कार्य की शुरुआत उनसे ही होती है। वे बाधाओं को दूर करने वाले और जीवन में सफलता का मार्ग दिखाने वाले देवता हैं। इसी कारण उनके प्रतीक ‘शुभ’ और ‘लाभ’ को घर के मुख्य द्वार पर अंकित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

‘शुभ’ और ‘लाभ’ हैं भगवान गणेश के पुत्र
धार्मिक ग्रंथों में वर्णन है कि भगवान गणेश का विवाह प्रजापति विश्वकर्मा की पुत्री रिद्धि और सिद्धि से हुआ था। इनसे उन्हें दो पुत्र प्राप्त हुए — ‘शुभ’ और ‘लाभ’। ‘रिद्धि’ बुद्धि और समृद्धि की प्रतीक मानी जाती हैं, जबकि ‘सिद्धि’ का अर्थ है आत्मबल और सिद्धि की पूर्णता। इन्हीं से उत्पन्न ‘शुभ’ और ‘लाभ’ का भाव है — जीवन में मंगल और उन्नति का संयोग। इसी कारण कहा जाता है कि जब घर के प्रवेश द्वार पर ‘शुभ-लाभ’ लिखा जाता है, तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है और मां लक्ष्मी का वास स्थायी होता है।

स्वास्तिक का गणेश स्वरूप और धार्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार ‘स्वास्तिक’ स्वयं भगवान गणेश का प्रतीक चिन्ह है। स्वास्तिक की चार रेखाएं चार दिशाओं में शुभता फैलाने का संकेत देती हैं और इसकी दोनों रेखाएं रिद्धि-सिद्धि का प्रतिनिधित्व करती हैं। इसलिए किसी भी मांगलिक कार्य, पूजा या गृह प्रवेश के समय स्वास्तिक का अंकन अनिवार्य माना गया है। यह प्रतीक नकारात्मकता को समाप्त करता है और घर में मंगलमय वातावरण बनाए रखता है।

दरवाजे पर शुभ-लाभ लिखने का असली अर्थ
घर के प्रवेश द्वार पर ‘शुभ’ और ‘लाभ’ लिखने की परंपरा यह दर्शाती है कि गृहस्वामी अपने जीवन में सदैव शुभ घटनाओं और लाभकारी अवसरों की कामना कर रहा है। ‘शुभ’ का भाव है मंगल, सौभाग्य और सुखद आरंभ, जबकि ‘लाभ’ का अर्थ है आर्थिक वृद्धि और प्रगति। जब यह दोनों शब्द साथ लिखे जाते हैं, तो यह जीवन में संतुलन, सफलता और समृद्धि का प्रतीक बन जाते हैं।

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