क्या धर्म बदलने के बाद भी दलितों को मिलेगा आरक्षण?

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August 25, 2026

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क्या धर्म बदलने के बाद भी दलितों को मिलेगा आरक्षण?

-इसे लेकर क्या कहता है संविधान, पूर्व प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता में आयोग गठित

नई दिल्ली/- धर्मांतरण और आरक्षण को लेकर पूरे देश में बहस छिड़ी हुई है। हर कोई जानना चाहता है कि क्या धर्म बदलने के बाद भी एक दलित को आरक्षण का लाभ मिलेगा और अगर मिलेगा तो किस आधार पर और अगर ऐसा है तो इससे धर्मांतरण रूकने वाला नही और एक दिन दलित समाज ही समाप्त हो जायेगा। तो फिर आरक्षण किस बात का। इन्ही सवालों का जवाब तलाशने के लिए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व प्रधान न्यायाधीश के.जी. बालाकृष्णन की अध्यक्षता में एक आयोग गठित किया है। जो यह तय करेगा कि क्या धर्मांतरण के बाद भी दलित को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए? और मौजूदा संविधान इस बारें में क्या कहता है ?

दशहरे के दिन आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने एक बड़ा आयोजन कराया। इसमें दावा किया गया कि दस हजार लोगों ने हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लिया। इस बीच, केंद्र सरकार ने पूर्व प्रधान न्यायाधीश के. जी. बालकृष्णन की अध्यक्षता में एक आयोग गठित कर दिया। यह आयोग तय करेगा कि क्या धर्मांतरण के बाद भी दलितों को आरक्षण का लाभ मिले?

1. अभी संविधान में क्या है नियम?धर्मांतरण के बाद आरक्षण को लेकर अभी भी नियम है। संविधान (एससी) आदेश, 1950 कहता है कि हिंदू या सिख धर्म या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता है। मतलब अभी सिर्फ हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय के लोग आरक्षण और दूसरी सुविधाओं का फायदा उठा सकते हैं। मूलतः संविधान में हिन्दू धर्म के एससी समुदाय के लिए आरक्षण की व्यवस्था थी। बाद में 1956 में इसे सिख और 1990 में बौद्ध के लिए भी जोड़ दिया गया। अगर कोई इस्लाम या ईसाई धर्म अपनाता है, तो उसे आरक्षण और अन्य दूसरी सुविधाओं का लाभ नहीं मिलता है। हां, अगर वह फिर से हिंदू धर्म में आ जाता है, तो उसे लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। इसी को लेकर विवाद है। लंबे समय से मुस्लिम और ईसाई समूहों की मांग है कि उन दलितों के लिए आरक्षण की समान स्थिति रखी जाए, जिन्होंने उनका धर्म अपना लिया है। इसी पर फैसला करने के लिए केंद्र सरकार ने हाल ही में एक कमेटी का गठन किया है।

2. क्या अब धर्म बदलने के बाद भी आरक्षण का लाभ मिलने लगेगा?यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से अपना स्टैंड क्लियर करने को बोला था। यही कारण है कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस के. जी. बालकृष्णन की अगुआई में एक कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी का कार्यकाल दो साल का होगा। ये कमेटी अध्ययन करके रिपोर्ट तैयार करेगी कि दलित से ईसाई या फिर इस्लाम धारण करने वालों को क्या आरक्षण का लाभ दिया जाए या नहीं?

3. अगर नियम बदलता है तो किसे होगा फायदा?अगर कमेटी इस्लाम या ईसाई बनने वाले दलितों को एसी का दर्जा देने की संतुति करती है तो इसका लाभ दलित ईसाई और दलित मुस्लिम को मिलने लगेगा। इनकी संख्या दो लाख से ज्यादा बताई जा रही है। अभी तक केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के आरक्षित वर्ग को ही इसका लाभ मिलता था।

तो बौद्ध बनने वाले लोगों को मिलेगा आरक्षण का लाभ?

ये सवाल हमने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्रप्रकाश पांडेय से पूछा। उन्होंने कहा, ’अगर आरक्षित वर्ग से कोई बौद्ध धर्म अपनाता है तो उसे आरक्षण का लाभ जरूर मिलेगा। हालांकि, अनारक्षित वर्ग का अगर कोई बौद्ध बनता है तो उसे इसका लाभ नहीं मिलेगा।’

देश में चल रही बहस और कोर्ट व सरकार का कोई भी कदम व निर्णय आरक्षण को लेकर आगे की रूपरेखा तय करेगा। लेकिर एक बात जो सभी के मन को कचोट रही है कि आरक्षण हिंदुओं के लिए था तो इसमें और धर्मो के लोग क्यों जोड़े जायें और अगर ऐसा होता है तो इससे हिंदु धर्म पर विपरीत असर पड़ेगा और धर्मांतरण रूकने की बजाये ज्यादा तेजी से होगा। देश में अब सभी को आयोग की रिपोर्ट व सरकार के अगले कदम का इंतजार है।

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