कोरोना काल के बाद भारत में बढ़ रहे मांसाहारी, 2025 तक बढ़ जायेगी मांस की खपत

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कोरोना काल के बाद भारत में बढ़ रहे मांसाहारी, 2025 तक बढ़ जायेगी मांस की खपत

-प्रोटीन के लिए अधिकांश भारतीय अपने भोजन में शाकाहार की बजाये मांस को दे रही तरजीह

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- कोरोना काल में प्रोटीन व विटामिन की बढ़ी मांग को देखते हुए आम भारतीय भी अब अपने भोजन की पौष्टिकता बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है। दवाईयों व मैडिकल सप्लीमेंट पर खर्च करने की बजाये अब अधिकांश भारतीय अपने खाने की पौष्टिकता पर जोर दे रहा है। हालांकि भारत में अभी तक लोग शाकाहार पर ही ज्यादा जोर देते है लेकिन अब कोरोना काल के बाद लोगों का रूझान मांसाहार की तरफ भी बढ़ गया है। जिसे देखते हुए एक सर्वेक्षण मंे खुलासा हुआ है कि 2025 तक अधिकांश भारतीय मांसाहार को अपने खाने में शामिल कर लेंगे। जिसके चलते देश में मांस की खपत काफी बढ़ जायेगी।
                      हाल में ही भारतीय परिवारों के खान-पान के खर्च को लेकर फिच रेटिंग्स की यूनिट फिच सॉल्यूशंस की एक रिपोर्ट सामने आई है। इसमें बताया गया है कि पिछले 20 वर्षों में लोगों की आमदनी में अच्छी खासी वृद्धि हुई है। जिसकी वजह से लोगों का खानपान विशेष तौर पर प्रोटीन युक्त भोजन का आकर्षण बढ़ा है। रिपोर्ट के विश्लेषण के अनुसार, भारतीय परिवारों में 2005 के मुकाबले 2025 में अनाज, चावल, ब्रेड पर होने वाला खर्च 28.8 फीसदी से घटकर 23.8 फीसदी तक रह सकता है। जबकि फलों पर होने वाला खर्च 6.4 फीसदी से बढ़कर 16 फीसदी तक पहुंच सकता है।
                     सर्वे के अनुसार, 2005 में भारतीय परिवारों का खाने पाने का घरेलू बजट 33.2 फीसदी था। इसमें वे 17.5 फीसदी चिकन, मटन और प्रोटिन सामग्रियों पर खर्च करते थे। जबकि 2025 में भारतीय परिवारों के खाने पीने का घरेलू बजट 35.3 फीसदी होने का अनुमान लगाया गया हैं। इसमें वे 30.7 फीसदी खर्च मटन, चिकन और अन्य प्रोटीनयुक्त भोजन पर करेंगे। 2005 से 2025 के बीच मटन पर खर्च में सालाना 17 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। इस दौरान पूरे खाने पर होने पर होने वाले खर्च में 12 फीसदी का इजाफा हो सकता है। रिपोर्ट में सामने आया कि 2012 से 2021 के बीच मटन और मछली के दाम में सालाना 7.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है जबकि इस दौरान औसत महंगाई दर 5.8 फीसदी रही है।
                      रिपोर्ट में एक तथ्य ये भी सामने निकलकर आया कि 2025 तक मांसाहार में 71 फीसदी चिकन की खपत होगी। 2005 से 2025 के बीच देश में प्रति व्यक्ति चावल की खपत 70.4 किलो से बढ़कर 77.1 किलो तक पहुंच सकती है। आटे जैसी खाद्य सामग्री पर होने वाले खर्च में औसतन 11.9 फीसदी सालाना की बढ़ोतरी हो सकती है।

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