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September 5, 2026

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कृष्ण से पूर्व किन ऋषियों ने दिया था गीता का उपदेश?

-महान संतों की गीता वाणी: जीवन को नई दिशा देने वाला ज्ञान

नई दिल्ली/सिमरन मोरया/- देशभर में जन्माष्टमी का उत्साह चरम पर है। घरों और मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं। कंस वध जैसे उनके बचपन के कारनामों से परे, श्रीकृष्ण की जीवन यात्रा महाभारत में कुरुक्षेत्र के युद्ध में चरमोत्कर्ष पर पहुंची। यहीं उन्होंने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया, जो युद्ध की प्रेरणा से कहीं अधिक, जीवन के सत्य और आध्यात्मिकता का मार्गदर्शन है। श्रीकृष्ण ने स्वयं बताया कि यह ज्ञान सृष्टि के प्रारंभ में सूर्य को दिया गया था, जो युगों-युगों से ऋषियों द्वारा प्रसारित होता रहा है। पर क्या आप जानते है की श्री कृष्ण पहले भी गीता कई बार कही जा चुकी है। आइए जानते है कि किसने सबसे पहले दिया था गीता का ज्ञान।

गणेश गीता: महागणपति का दिव्य उपदेश
कम प्रचलित किंतु उतनी ही गहन है गणेश गीता, जो गणेश पुराण और भागवत पुराण में वर्णित है। भगवान गणेश ने महागणपति रूप में राजा वरेण्य को यह ज्ञान दिया, जो मोह और पश्चाताप में डूबे थे। गजानन के रूप में जन्मे गणेश ने सिंदूरासुर का वध किया और राजा को 11 अध्यायों व 414 श्लोकों में योग, कर्म और भक्ति का उपदेश दिया। उनके विराट स्वरूप के दर्शन ने वरेण्य को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर मोक्ष का मार्ग दिखाया।

अष्टावक्र गीता: आत्मज्ञान का सरल मार्ग
अष्टावक्र गीता त्रेतायुग में ऋषि अष्टावक्र और राजा जनक के संवाद से उपजी। जनक के मन में अष्टावक्र के टेढ़े-मेढ़े शरीर के प्रति उपजे तिरस्कार को चुनौती देते हुए, ऋषि ने आत्मा की शुद्धता पर बल दिया। 20 अध्यायों में उन्होंने ज्ञान, मुक्ति और वैराग्य के प्रश्नों का उत्तर दिया, जो अद्वैत वेदांत का सरल मार्ग है। स्वामी रामकृष्ण ने भी यही ज्ञान विवेकानंद को दिया था।

व्याध गीता: कर्म की महत्ता
महाभारत के वन पर्व में वर्णित व्याध गीता में एक शिकारी ने अभिमानी तपस्वी को कर्म का सिद्धांत समझाया। अपने माता-पिता की सेवा और कर्तव्यों में लीन व्याध ने बताया कि कोई भी कार्य छोटा नहीं, यदि वह निष्ठा से किया जाए। ऋषि मार्कण्डेय ने युधिष्ठिर को यह कथा सुनाई, जो कर्म की पवित्रता को रेखांकित करती है। ये तीनों गीताएं श्रीकृष्ण की गीता के साथ मिलकर सत्य और धर्म के विविध मार्गों को उजागर करती हैं।

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