कतर पर इजरायल का हमला: मुस्लिम देशों की क्या होगी जवाबी रणनीति?

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August 19, 2026

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कतर पर इजरायल का हमला: मुस्लिम देशों की क्या होगी जवाबी रणनीति?

-पाकिस्तान, सऊदी, यूएई और तुर्की ने दिखाया गुस्सा -सैन्य जवाब के लिए, कतर को उकसाया

दोहा/सिमरन मोरया/-  कतर की राजधानी दोहा पर इजरायली हमले के बाद बवाल मचा हुआ है। दुनिया का लगभग हर देश कतर पर इजरायली हमले की निंदा कर रहा है। हालांकि, कुछ देश ऐसे हैं, जो ज्यादा ही गुस्से में हैं। इनमें भुक्तभोगी कतर के अलावा, पाकिस्तान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और तुर्की हैं। ये सभी देश कतर को इजरायल के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए उकसा रहे हैं। हालांकि, कतर अभी जुबानी कार्रवाई के लिए ही तैयार दिख रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कतर पर इजरायली हवाई हमले का मुस्लिम देश जवाब देंगे। सवाल यह भी है कि यह जवाब सैन्य होगा या कूटनीतिक।

मंगलवार को दोहा में हमास अधिकारियों की एक बैठक को निशाना बनाकर किए गए हमले में छह लोग मारे गए हैं। इनमें एक कतरी सुरक्षा अधिकारी भी शामिल है। हालांकि, इस हमले में हमास के किसी शीर्ष अधिकारी के मारे जाने की सूचना नहीं है। वहीं, इजरायल ने कहा है कि अगर हमास नेता जिंदा बच जातें हैं तो उन्हें अगले हमले में मार गिराया जा सकता है। अमेरिका पहले से ही इस हमले से पल्ला झाड़ रहा है, हालांकि जानकारों का कहना है कि इजरायल अकेले इतना बड़ा कदम नहीं उठा सकता है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कतर पर हमले की बात को खुलकर स्वीकार किया है और हमास नेताओं की मेजबानी करने के लिए कतरी प्रशासन की आलोचना की है।

इजरायल ने पहली बार कतर को बनाया निशाना
मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के अनुसार, यह पहली बार है, जब इजरायल ने खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के किसी सदस्य की धरती पर हमले की बात खुले तौर पर स्वीकार किया है। इजरायल ने उस देश को निशाना बनाया है, जहां अमेरिकी सेंट्रल कमांड का क्षेत्रीय मुख्यालय स्थित है। इस देश में अमेरिका के 8000 से ज्यादा सैनिक तैनात हैं। मिडिल ईस्ट आई से बात करते हुए किंग्स कॉलेज लंदन के शिक्षाविद और खाड़ी सुरक्षा विशेषज्ञ एंड्रियास क्रेग ने कहा, “कतर उन साधनों का इस्तेमाल करेगा, जिन्हें वह सबसे अच्छी तरह से जानता है, वह है- कूटनीति और कानून।” कतर के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि जवाब तैयार करने के लिए एक कानूनी टीम बनाई गई है।

कतर नहीं करेगा जवाबी सैन्य कार्रवाई
रिपोर्ट में क्रीज ने कहा कि कतर की ओर से इजरायल के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की कोई संभावना नहीं दिखती है। उन्होंने कहा, “कतर में सैन्य वृद्धि की न तो कोई इच्छा है और न ही इसके साधन। अभी उसका ध्यान खुद को बचाने की ओर केंद्रित होगा। कतर के सैन्य सलाहकार पहले से ही इस बात पर विचार कर रहे थे कि ईरानी हमलों से कैसे बचा जाए; अब वे खुले तौर पर इस पर विचार कर रहे हैं कि इजरायल को कैसे रोका जाए।”

इजरायली हमले की भनक तक नहीं लगी
जून में, ईरान ने अपने तीन परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमलों का जवाब कतर में अमेरिका के अल उदीद अड्डे पर हमला करके दिया था। यह एक बेहद सुनियोजित हमला था, जिसमें ईरान ने कतर को सूचित करके अमेरिका को अप्रत्यक्ष चेतावनी दी थी। दोहा और वाशिंगटन बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने के लिए पैट्रियट सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल बैटरियों का इस्तेमाल करके पहले से ही तैयारी कर चुके थे। लेकिन मंगलवार को ऐसी कोई तैयारी संभव नहीं थी।

अमेरिका ने कतर को दिया धोखा
कतर के विदेश मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने मंगलवार को मीडिया को बताया कि ईरानी हमले ने दुनिया को दिखाया कि दोहा मिसाइल हमलों से कैसे निपट सकता है, जबकि इजरायल ऐसे हथियारों का इस्तेमाल करने में सक्षम था “जिन्हें इस रडार ने नहीं पकड़ा”। विदेश मंत्री ने अमेरिकी दावों का खंडन करते हुए कहा कि उसने कतर को इजरायली हमले की पूर्व चेतावनी दी थी, और कहा कि अमेरिकी सूचना “हमले के 10 मिनट बाद” आई थी।

खाड़ी में ‘साझा आक्रोश’
इजरायली हमले के बाद खाड़ी देशों में साझा आक्रोश देखने को मिल रहा है। कई देशों ने आपसी दुश्मनी को भुलाकर कतर का समर्थन किया है। इसने दुश्मनों को एक साथ लाने में भी मदद की है। संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान बुधवार को वार्ता के लिए दोहा पहुंचने वाले थे और एक दिन बाद सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान उनसे मिलने वाले थे। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भी कतर जाने की सूचना है।

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