
नजफगढ़ मेट्रो न्यूज/ नई दिल्ली/ शिवकुमार यादव। कश्मीरी गेट इलाके में ई-रिक्शा सवार लोगों से नकदी लूटने और विरोध करने पर एक व्यक्ति की हत्या के मामले को दिल्ली पुलिस ने सुलझाने का दावा किया है। पुलिस ने मृतक के चचेरे भाई समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक 16 वर्षीय किशोर को भी पकड़ा गया है। पुलिस के मुताबिक, वारदात में शामिल तीन अन्य आरोपी अभी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।
पुलिस के अनुसार, 24 सितंबर की शाम करीब 7:20 बजे मध्य प्रदेश के मुरैना निवासी सचिन अपने चाचा प्रभात के साथ गांधी नगर मार्केट से दुकानों की पेमेंट वसूलकर ई-रिक्शा से लौट रहे थे। सलिमगढ़ किले के पीछे नीली छतरी मंदिर अंडरपास के पास चार बदमाशों ने ई-रिक्शा को रोक लिया और नकदी से भरा पॉलीथिन बैग छीनने का प्रयास किया।

प्रभात ने लूट का विरोध किया तो बदमाशों ने उस पर, सचिन और एक अन्य यात्री पर चाकू से हमला कर दिया। इसके बाद आरोपी नकदी लेकर फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल प्रभात को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस संबंध में कश्मीरी गेट थाने में हत्या, लूट और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया।
500 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले
मामले की गंभीरता को देखते हुए कश्मीरी गेट थाना और नॉर्थ जिला स्पेशल स्टाफ की संयुक्त टीम बनाई गई। पुलिस ने वारदात स्थल और आसपास के रास्तों पर लगे 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच के दौरान एक मारुति स्विफ्ट कार तेज गति से अंडरपास के पास यू-टर्न लेकर सलिमगढ़ किले की ओर जाती दिखाई दी।
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के साथ एएनपीआर कैमरों और तकनीकी निगरानी का विश्लेषण किया। जिस नंबर की पहचान हुई, वह नोएडा निवासी भगत सिंह के नाम दर्ज वाहन का था, लेकिन जांच में सामने आया कि सीसीटीवी में दिखाई दे रही कार अलग थी। पुलिस ने इसे फर्जी नंबर प्लेट के इस्तेमाल का सुराग माना।
इसके बाद करीब 150 कैमरों की फुटेज का अलग से विस्तृत विश्लेषण किया गया। जांच में वारदात से करीब दो घंटे पहले उत्तर प्रदेश नंबर की एक कार यमुना की तरफ से लोहे के पुल के रास्ते अंडरपास की ओर आती दिखाई दी। कार में पांच से छह लोग सवार थे। आगे की फुटेज के आधार पर पुलिस ने कार और संदिग्धों की पहचान की। कार झांसी निवासी दीपु के नाम पंजीकृत मिली।
मृतक के चचेरे भाई की भूमिका सामने आई

पुलिस के मुताबिक, दीपु के कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच के दौरान एक मोबाइल नंबर संदिग्ध मिला। यह नंबर मृतक प्रभात और दीपु दोनों के संपर्क में था। जांच में नंबर का इस्तेमाल मृतक के चचेरे भाई ओम द्वारा किए जाने की बात सामने आई।
इसके बाद पुलिस टीम ने कानपुर और झांसी में छापेमारी कर ओम को पकड़ा। उसकी पूछताछ और तकनीकी जांच के आधार पर दीपु और एक किशोर को झांसी से पकड़ा गया। वहीं एक अन्य आरोपी अभिषेक को इटावा से गिरफ्तार किया गया।
नकदी की जानकारी देने का आरोप
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में ओम ने बताया कि प्रभात उसका सगा चचेरा भाई था और उसने प्रभात की गतिविधियों तथा उसके पास नकदी होने की जानकारी राज और दीपु के साथ साझा की थी। पुलिस के मुताबिक, इसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर नोएडा में योजना बनाई और वारदात को अंजाम देने के लिए अंडरपास पहुंचे।
पुलिस का कहना है कि दीपु अपने गांव से रोहित यादव और एक किशोर को लेकर आया था, जबकि राज और ओम ने कथित तौर पर अनिरुद्ध चौहान और अभिषेक से संपर्क किया। दीपु की स्विफ्ट कार से कुछ आरोपी अंडरपास पहुंचे, जबकि अभिषेक के मोटरसाइकिल से वहां पहुंचने की बात सामने आई है।
वारदात के बाद आरोपी कथित तौर पर नोएडा पहुंचे, जहां लूटी गई रकम बांटी गई। इसके बाद सभी अलग-अलग स्थानों पर चले गए।
2.29 लाख रुपये बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अब तक 2,29,800 रुपये बरामद किए हैं। इनमें अभिषेक से 1.10 लाख रुपये, दीपु से 19,800 रुपये और किशोर से एक लाख रुपये बरामद होने की बात पुलिस ने कही है।
गिरफ्तार आरोपियों में ओम सिंह (21), दीपु राठौर (28) और अभिषेक (24) शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, दीपु के खिलाफ उत्तर प्रदेश में दुष्कर्म, पॉक्सो, हत्या के प्रयास, रंगदारी, दंगा और गैंगस्टर एक्ट समेत कई मामले दर्ज रहे हैं। पुलिस ने किशोर के खिलाफ भी पूर्व के आपराधिक मामलों का उल्लेख किया है।
पुलिस के अनुसार, मामले में तीन अन्य आरोपी अभी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग टीमें लगाई गई हैं। पुलिस लूटी गई शेष रकम बरामद करने के साथ ही सभी आरोपियों की भूमिका और वारदात की पूरी कड़ी की जांच कर रही है।





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