ईश की अद्वितीय कृति है प्रकृति

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31  
August 22, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

ईश की अद्वितीय कृति है प्रकृति

निहारो भोर का उजियारा और सूर्य की लालिमा।
प्रफुल्लित हो उठेगी सहर्ष ही अंतरात्मा।।

सुनहरी धूप और साँझ की अनुपम घटा।
अंबर में फैली चहु ओर बादलों की अनुपम छटा।।

फूलों ने फैलायी हर ओर मनमोहक सुगंध।
प्रकृति का अनुपम सौन्दर्य है सबके लिए उपलब्ध।।

वर्षा देती प्रकृति को यौवन का आवरण।
एकांत में अनुभव करे प्रकृति के संग कुछ सुखद क्षण।।

इंद्रधनुष की छायी नभ में अनुपम बाहर।
प्रकृति है मानव को ईश का अमूल्य उपहार।।

नदियाँ करती कल-कल का सुमधुर गीत।
कितना आकर्षक है यह कुदरत का संगीत।।

प्रकृति है ईश्वर की अनूठी कलाकृति।
अद्वितीय रचनात्मकता से बनी हर आकृति।।

सजीव एवं निर्जीव को समान रूप से समाहित करती प्रकृति।
विकास की अंधी दौड़ में मानव न दे इसको विकृति।।

झीलों-झरनों से गिरता हुआ जल।
कितना है मनोरम जो करता मन को निर्मल।।

पद्यपुराण में वर्णित है नदी किनारों पर लगाए वृक्ष।
उतना ही मजबूत होगा आपका स्वर्ग में आनंद का पक्ष।।

आसमां को जीवंत बनाती पंक्षियों की स्वच्छंद उड़ान।
डॉ. रीना कहती प्रकृति की निःशुल्क अद्भुत धरोहर का करें सदैव सम्मान।।

-डॉ. रीना रवि मालपानी (कवयित्री एवं लेखिका)

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox