इस गांव में नहीं मनाई जाती राखी! जानिए यूपी की अनोखी परंपरा की वजह

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September 17, 2026

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इस गांव में नहीं मनाई जाती राखी! जानिए यूपी की अनोखी परंपरा की वजह

यूपी/सिमरन मोरया/- देशभर में हर साल रक्षाबंधन का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। वहीं, बाजारों में भी राखियों की रौनक दिखने लगती है, लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि गाज़ियाबाद से करीब 20 किलोमीटर दूर मुरादनगर के सुराना गांव में रक्षाबंधन का त्योहार नहीं मनाया जाता है? इस दिन सुराना गांव में एक अजीब सा सन्नाटा पसरा रहता है। इस गांव में रक्षाबंधन के दिन कोई उत्सव नहीं होता, न घरों में मिठाइयां बनती हैं और न बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं। गांव के लोग इस दिन को ‘काला दिन’ के रूप में मनाते हैं।

क्या है सुराना गांव का पुराना नाम?
सुराना गांव में रक्षा बंधन न मनाए जाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। गांव वालों का कहना है कि यह सब 12वीं सदी में हुई एक दिल दहला देने वाली घटना के कारण शुरू हुआ। बताया जाता है कि यह गांव मूल रूप से छबड़िया गोत्र के यदुवंशी अहीरों ने बसाया था। वे राजस्थान के अलवर से आकर हिंडन नदी के किनारे बसे थे। ये जाति युद्धप्रिय थी, जिसकी वजह से उन्होंने गांव का नाम ‘सौराणा’ रखा, जो वक्त के साथ बदलकर ‘सुराना’ हो गया।

क्या है इसके पीछे की कहानी?
साल 1192 में तराइन के दूसरे युद्ध में मुहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को हराया। इसके बाद चौहान की सेना के कुछ बचे हुए अहीर सैनिक सुराना गांव में आकर छिप गए। जब मोहम्मद गौरी को इसका पता चला तो उसने अपनी 50 हजार सेना के साथ गांव पर हमला कर दिया। कहा जाता है कि ये हमला रक्षाबंधन के दिन हुआ था।

गौरी ने गांव को चारों ओर से घेर लिया और युद्ध के लिए तैयार होने की चेतावनी दी। इस दौरान गांववालों ने भी हार नहीं मानी और डटकर मुकाबला किया, लेकिन संख्या में कम होने की वजह से वे गौरी की सेना के सामने टिक नहीं सके। गौरी ने गांव में भयानक कत्लेआम किया। यहां तक कि महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों तक को नहीं छोड़ा। गांव के लोगों का कहना है कि रक्षाबंधन के दिन गांव के सभी भाइयों की कलाई इस दिन सूनी रहती है। जब पूरे देश में लोगों की कलाईयों पर रंग-बिरंगी राखियां सजी रहती हैं, तो वहीं इस मौके पर हमारे गांव में सन्नाटा पसरा रहता है।

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