इस्कॉन ‘द अमेरीलिस’ करोल बाग में भगवान के प्रथम दर्शन 4 मई को

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August 24, 2026

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इस्कॉन ‘द अमेरीलिस’ करोल बाग में भगवान के प्रथम दर्शन 4 मई को

-इस्कॉन द्वारका की ओर से 4 मई को विग्रहों की प्राण-प्रतिष्ठा -सेंट्रल दिल्ली का अनोखा मंदिर इस्कॉन ‘द अमेरीलिस’ करोल बाग -बरसों पुरानी डीसीएम मिल की जगह भव्य इस्कॉन मंदिर की स्थापना

नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- इस्कॉन द्वारका की ओर से सेंट्रल दिल्ली के करोल बाग में श्री श्री राधा मदन गोपाल का एक नया मंदिर ‘द अमेरीलिस’ इस्कॉन खुलने जा रहा है। जिसके विग्रहों की प्राण-प्रतिष्ठा 4 मई को दोपहर 12 बजे की जाएगी। मंदिर के उद्घाटन का विधिवत समारोह 2 मई से वास्तु शांति होम यज्ञ और नरसिंह यज्ञ के साथ आरंभ किया गया। इस अवसर परम पूजनीय भक्ति आश्रय वैष्णव स्वामी महाराज उपस्थित थे। उन्होंने मंदिर के उद्घाटन अवसर पर भक्तों को शुभकामनाएँ दीं और इस्कॉन द्वारका को इसी तरह अनेक मंदिरों के निर्माण के लिए शुभाशीष प्रदान किया।

2 से 4 मई तक आयोजित इस समारोह में 3 मई को शिल्प दोष स्नान और अधिवास आदि कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। फिर 4 मई हजारों भक्तों के बीच प्रातः 10 बजे महा अभिषेक का कार्यक्रम है और उसके बाद फिर प्राण-प्रतिष्ठा यज्ञ संपन्न किया जाएगा। तत्पश्चात दोपहर 1 बजे सभी भक्तों के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था की गई है। फिर दोपहर 2 बजे श्री श्री राधा मदन गोपाल के प्रथम दर्शन भक्तों के लिए खोले जाएँगे। सुगंधित पुष्पों एवं अनेक सजावटी वस्तुओं से सजे ऑल्टर में भक्तगण भगवान की कृपा प्राप्त करेंगे। सेंट्रल दिल्ली में इस्कॉन ‘द अमेरीलिस’ का खुलना वैष्णव परंपरा के प्रति लोगों की अपार श्रद्धा एवं प्रेम की परिचायक है। इससे सिद्ध होता है लोग आज भी अपनी परंपराओं से जुड़े हैं और बच्चों में भी यही संस्कार विकसित करना चाहते हैं और रिहायशी सोसाइटीज में इस तरह के मंदिरों का वे खुलकर स्वागत करते हैं।

इस्कॉन द्वारका आप सभी को श्री श्री राधा मदन गोपाल मंदिर के भव्य उद्घाटन के लिए हार्दिक आमंत्रित करता है। इस्कॉन द्वारका के उपाध्यक्ष श्रीगौर प्रभु का कहना है किकृ ‘ऐतिहासिक दिल्ली के कोने-कोने में इसका रोचक इतिहास छुपा हुआ है। बरसों पहले सेंट्रल दिल्ली के करोल बाग में जहाँ डीसीएम मिल का क्लाथ हाउस हुआ करता था, अब यहाँ इस्कॉन ‘द अमेरीलिस’ स्थापित किया जा रहा है। मंदिर की स्थापना में यूनिटी ग्रुप ने सहयोग किया है जिन्होंने यहाँ के आवासीय परिसर में मंदिर के माध्यम से आध्यात्मिक जीवनशैली को अपनाने का भी एक सुनहरा अवसर प्रदान किया है।’
           इस्कॉन द्वारका के अध्यक्ष प्रद्युमन प्रिय प्रभु का कहना है किकृ ‘हमें खुशी है कि अनेक प्रयासों के बाद राजधानी दिल्ली का दिल कहा जाने वाली सेंट्रल दिल्ली में भी अब इस्कॉन मंदिर की स्थापना की जा रही है। इस्कॉन के संस्थापक श्रील प्रभुपाद चाहते थे कि कलियुग में बद्ध जीवों के उद्धार के लिए हरिनाम के प्रचार के साथ-साथ जगह-जगह मंदिरों का निर्माण हो। लोग प्रतिदिन भगवान के दर्शन करें, उन्हें पुष्प अर्पित करें, दीप-धूप दिखाएँ, अपने भावानुसार भोग अर्पण करें अर्थात विग्रहों की किसी न किसी रूप में सेवा करें। ऐसे में रिहायशी इलाकों में मंदिरों की स्थापना जरूरी है। इस्कॉन द्वारका की ओर से इस्कॉन चाँदनी चौक व इस्कॉन बिजवासन के बाद इस्कॉन ‘द अमेरीलिस’ करोल बाग तीसरा मंदिर है। इसके मूल में हमारी प्रेरणा के स्रोत परम पूजनीय गोपाल कृष्ण महाराज हैं, जो नित्य-लीला प्रविष्ट होने के बाद भी कदम-कदम पर अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं।’

इस्कॉन ‘द अमेरीलिस’ करोल बाग जगह का इतिहास
पुराने दिल्लीवासी जानते हैं कि करोल बाग स्थित डीसीएम मिल ने दिल्ली के औद्योगिक विकास में गहरी भूमिका निभाई है। डीसीएम की स्थापना 1889 में लाला चुन्नामल, मास्टर शिव प्रसाद और राय बहादुर राम किशन दास गुरवाले द्वारा की गई थी। यह उत्तर भारत की पहली बड़ी कपड़ा मिलों में से एक थी, जिसने क्षेत्र के औद्योगिकीकरण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित किया। इस मिल ने न केवल हजारों लोगों को रोज़गार प्रदान किया, बल्कि स्थानीय समाज और संस्कृति में भी अपना योगदान दिया। उदाहरण के लिए, डीसीएम द्वारा मिल के कर्मचारियों द्वारा बाड़ा हिंदू राव क्षेत्र में आयोजित की जाने वाली रामलीला को लोग आज भी नहीं भूले हैं। इस रामलीला में एक आकर्षक घूमता हुआ मंच (रिवॉल्विंग स्टेज) हुआ करता था जिसमें पहली बार हनुमान जी को उड़ते हुए दर्शाया गया था, जो यह दर्शाता है कि कंपनी स्थानीय परंपराओं से किस प्रकार जुड़ी हुई थी। 90 के दशक में कानूनी आदेशानुसार डीसीएम मिल को बंद करना पड़ा। इसके बाद मिल की सभी गतिविधियाँ हरियाणा के हिसार शहर में स्थानांतरित कर दी गईं।
          करोल बाग स्थित खाली हुई मिल की ज़मीन पर बड़े स्तर पर पुनर्विकास (रीडेवलपमेंट) किया गया। यूनिटी ग्रुप ने यहाँ पर ’द अमेरीलिस’ नामक रिहायशी सोसाइटी के साथ-साथ परिसर में मंदिर का भी निर्माण किया।

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