इंडिया हैबिटेट सेंटर में आरजेएस पॉजिटिव मीडिया का विजन 2026 प्रस्तुत

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-राष्ट्रीय मीडिया साक्षरता मिशन शुरू करने की उठी सशक्त मांग

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-    डिजिटल दौर में तेजी से बढ़ती भ्रामक सूचनाओं और मीडिया की विश्वसनीयता पर मंडरा रहे संकट के बीच आरजेएस पॉजिटिव मीडिया द्वारा इंडिया हैबिटेट सेंटर में एक महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और मीडिया पेशेवरों ने एक स्वर में सरकार से राष्ट्रीय मीडिया साक्षरता मिशन शुरू करने की मांग की। कार्यक्रम का आयोजन आरजेएस पॉजिटिव मीडिया के संस्थापक उदय कुमार मन्ना के संयोजन में हुआ, जिसमें सकारात्मक मीडिया आंदोलन के दस वर्ष पूरे होने का उत्सव भी मनाया गया। इस अवसर पर वर्ष 2026 के लिए एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया—देश में प्रसारित होने वाली मीडिया सामग्री का कम से कम 90 प्रतिशत हिस्सा तथ्यपरक, रचनात्मक और समाजोपयोगी हो।

पॉजिटिव मीडिया भारत–उदय संकल्प यात्रा का शुभारंभ
कार्यक्रम के दौरान मीडिया जगत के वरिष्ठ विद्वान और मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) के. जी. सुरेश ने पॉजिटिव मीडिया भारत–उदय संकल्प यात्रा, आरजेएस न्यूजलेटर के दिसंबर अंक और मीडिया लिटरेसी वर्कशॉप का विधिवत शुभारंभ किया। यह यात्रा 1 जनवरी 2026 से आरंभ होकर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार की धरती को नमन करते हुए देशभर में सकारात्मक सोच और जिम्मेदार मीडिया के संदेश को आगे बढ़ाएगी। आरजेएस पीबीएस ऑब्जर्वर दीप माथुर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि बीते एक दशक में इस आंदोलन ने प्राचीन भारतीय ज्ञान और आधुनिक तकनीक के बीच एक सशक्त सेतु स्थापित किया है।

मीडिया साक्षरता हर नागरिक के लिए जरूरी: प्रो. के. जी. सुरेश
अपने संबोधन में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति एवं आईआईएमसी के पूर्व महानिदेशक प्रो. के. जी. सुरेश ने कहा कि मीडिया साक्षरता अब केवल पत्रकारों या मीडिया छात्रों तक सीमित विषय नहीं रह गया है, बल्कि 5 वर्ष से लेकर 95 वर्ष तक के प्रत्येक नागरिक के लिए यह एक आवश्यक जीवन कौशल बन चुका है। उन्होंने कहा कि आज का समाज सूचनाओं की बाढ़ से घिरा हुआ है, जहां सत्य और असत्य के बीच फर्क कर पाना कठिन होता जा रहा है।

प्रो. सुरेश ने डिजिटल खतरों को तीन वर्गों—मैल-इंफॉर्मेशन, मिस-इंफॉर्मेशन और डिस-इंफॉर्मेशन—में विभाजित करते हुए बताया कि किस प्रकार अधूरी सच्चाई, अनजाने में फैलाई गई गलत सूचनाएं और जानबूझकर फैलाया गया झूठ समाज में भ्रम और अशांति पैदा कर रहा है। उन्होंने उत्तर-पूर्वी भारत से जुड़े मामलों में मीडिया की सनसनीखेज रिपोर्टिंग पर भी सवाल उठाए और स्कूल स्तर से ही मीडिया साक्षरता को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने पर जोर दिया।

सकारात्मक समाज के लिए आत्मबोध और वैश्विक सोच पर जोर
योगी कवि आचार्य प्रेम भाटिया ने ‘तन, मन और धन’ के संतुलन को जीवन की सफलता का मूल बताया और कहा कि आत्मबोध के बिना सकारात्मक समाज की कल्पना अधूरी है। वहीं बहाई समुदाय के प्रतिनिधि डॉ. ए. के. मर्चेंट ने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को रेखांकित करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर किसी एक हिस्से में संकट पूरे विश्व को प्रभावित करता है।

उदय कुमार मन्ना ने किया नए जीवन चरण और राष्ट्रव्यापी यात्रा का ऐलान
आरजेएस के संस्थापक उदय कुमार मन्ना ने इस अवसर पर अपने जीवन के नए चरण ‘वानप्रस्थ’ की घोषणा करते हुए बताया कि वे 17 जनवरी से बिहार से पॉजिटिव मीडिया भारत–उदय संकल्प यात्रा की शुरुआत करेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से सकारात्मक सोच और रचनात्मक मीडिया प्रयासों का दस्तावेजीकरण करना है। उन्होंने आरजेएस की पांचवीं पुस्तक का विमोचन किया और जानकारी दी कि छठी पुस्तक 23 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस और पराक्रम दिवस के अवसर पर जारी की जाएगी।

उद्यमिता, साहित्य और सामाजिक सरोकारों पर विमर्श
कार्यक्रम में डॉ. दिनेश अल्बर्टसन और शंकुतला देवी ने नए वर्ष का संदेश देते हुए मीडिया साक्षरता पर अपने विचार साझा किए। उद्यमी लक्ष्मण प्रसाद ने अपने संघर्ष और सफलता की कहानी सुनाते हुए युवाओं से ‘मेक इन इंडिया’ के तहत उद्यमिता को अपनाने का आह्वान किया। कवि अशोक कुमार मलिक ने नई पीढ़ी को मीडिया साक्षर बनाने की आवश्यकता पर बल दिया, जबकि कवयित्री सरिता कपूर ने कविता के माध्यम से संघर्ष और आशा का संदेश दिया।

2026 के लिए सामूहिक संकल्प के साथ सम्मेलन का समापन
सम्मेलन के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने वर्ष 2026 के लिए अपने-अपने क्षेत्रों में सकारात्मकता के ब्रांड एंबेसडर बनने का संकल्प लिया। उदय कुमार मन्ना ने कहा कि सकारात्मक मीडिया से जुड़े लोग एक परिवार की तरह हैं और उनका कार्य व प्रलेखन आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सशक्त विरासत बनेगा।

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