आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियां, सार्वजनिक सुरक्षा बनाम पशु प्रेम पर बहस तेज

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September 17, 2026

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नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-    देश में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कई अहम और दूरगामी टिप्पणियां सामने आईं। बुधवार को इस मामले पर विचार करते हुए शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और किसी भी समस्या में रोकथाम इलाज से बेहतर होती है। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि आम नागरिक कैसे समझे कि कोई कुत्ता काटने के इरादे में है या नहीं।

‘सभी कुत्तों को पकड़ना समाधान नहीं’
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि हर आवारा कुत्ते को पकड़कर शेल्टर में रखना न तो व्यावहारिक है और न ही आर्थिक रूप से संभव। उन्होंने कहा कि इस समस्या का हल वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से तलाशना होगा। सिब्बल ने यह भी कहा कि असली चुनौती कानूनों के सही ढंग से पालन न होने की है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि किसी भी स्थिति में रोकथाम की नीति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

पशु प्रेम और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर अदालत की टिप्पणी
मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता वंदना जैन की दलीलों पर प्रतिक्रिया देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पशु प्रेम का मतलब केवल एक खास जानवर तक सीमित नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि कोई व्यक्ति अपने घर में जानवर रखना चाहता है या नहीं, यह उसका निजी फैसला है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति समाज में कोई बड़ा या खतरनाक जानवर ले आता है, तो उसके प्रभाव को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

गेटेड कम्युनिटी को मिलना चाहिए फैसला लेने का अधिकार
शीर्ष अदालत ने गेटेड सोसाइटी और रेजिडेंशियल कॉलोनियों के संदर्भ में भी अहम टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि यह तय करना कि किसी परिसर में आवारा कुत्तों को खुले में घूमने दिया जाए या नहीं, समुदाय का सामूहिक निर्णय होना चाहिए। यदि बहुसंख्यक निवासी इसे बच्चों और बुजुर्गों के लिए जोखिम मानते हैं, तो उनकी राय को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। अदालत ने यहां तक कहा कि भविष्य में कोई व्यक्ति यह तर्क भी दे सकता है कि उसे दूध चाहिए, इसलिए वह भैंस रखना चाहता है—ऐसे में नियमों की जरूरत और बढ़ जाती है।

मतदान से फैसला लेने का सुझाव
सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि गेटेड कम्युनिटी के लिए ऐसा कानूनी प्रावधान होना चाहिए, जिसके तहत निवासी मतदान के जरिए इस तरह के मुद्दों पर निर्णय ले सकें। वकील वंदना जैन ने भी अदालत को बताया कि यह बहस कुत्तों के खिलाफ नहीं, बल्कि बढ़ते खतरे और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि देश में आवारा कुत्तों की संख्या करोड़ों में है और हालात तेजी से नियंत्रण से बाहर हो रहे हैं।

सुनवाई जारी रहेगी
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला बेहद संवेदनशील है, जिसमें संतुलन बनाए रखना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए कि वह इस मुद्दे पर सभी पक्षों को सुनकर कोई व्यापक दिशा-निर्देश देने पर विचार कर सकता है। मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी।

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