अफगानिस्तान की जमीन का आतंकवाद के लिए ना हो इस्तेमाल- भारत-फ्रांस

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अफगानिस्तान की जमीन का आतंकवाद के लिए ना हो इस्तेमाल- भारत-फ्रांस

- भारत-फ्रांस संयुक्त कार्य समूह ने आतंकवादी समूहों के खिलाफ कार्रवाई का आह्वान किया

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/पेरिस/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/-  भारत और फ्रांस ने यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए नही होना चाहिए। इसके साथ ही दोनो देशों ने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन समेत सभी आतंकवादी समूहों के खिलाफ ठोस कार्रवाई का आह्वान किया। विदेश मंत्रालय के बयान में यह जानकारी दी गई है।
                 पेरिस में आतंकवाद से मुकाबला करने के विषय पर भारत-फ्रांस संयुक्त कार्य समूह की बैठक में दोनों पक्षों ने सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों सहित आतंकवाद के सभी स्वरूपों की निंदा की है। इसके साथ ही आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एकजुटता का संकल्प व्यक्त किया। दोनों देशों ने आतंक के लिए कोई धन नहीं विषय पर भारत की ओर से आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के तीसरे संस्करण की तैयारियों के मद्देनजर सक्रिय समन्वय की इच्छा जताई। मंगलवार को हुई बैठक में उन्होंने आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए एक उपकरण के रूप में आतंकवादियों और ऐसे समूहों का बहिष्कार करने और आतंकी समूहों एवं व्यक्तियों के खिलाफ प्रतिबंध की प्रक्रिया एवं प्राथमिकताओं के बारे में सूचना साझा करने के बारे में विचारों का आदान-प्रदान किया।
               संयुक्त बयान के अनुसार भारत और फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकी समूहों एवं व्यक्तियों से उत्पन्न खतरों के बारे में विचारों का आदान-प्रदान किया तथा अलकायदा और आईएसआईएस के साथ लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन सहित सभी आतंकवादी नेटवर्को के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने की जरूरत बताई। दोनों पक्षों ने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि आतंकवादी हमलों को अंजाम देने वालों को सुनियोजित तरीके और तेजी से न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाए।
                 यह बैठक ऐसे समय मे हुई है जब 13 वर्ष पहले 2008 में नवंबर में ही मुम्बई में आतंकवादी हमला हुआ था तथा 2015 में नवंबर माह में ही पेरिस में हमला हुआ था। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक में भारत और फ्रांस ने आतंकवाद के सभी स्वरूपों की एक स्वर में निंदा की। दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि सभी देशो को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके क्षेत्र का आतंकवादी हमले की योजना बनाने या आतंकवादी हमले के लिये इस्तेमाल नहीं किया जाए ।

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