अवैध घुसपैठ पर समाज को जागरूक होकर आगे आने की जरूरत : सूर्यकान्त केलकर

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अवैध घुसपैठ पर समाज को जागरूक होकर आगे आने की जरूरत : सूर्यकान्त केलकर

- भारत रक्षा मंच की प्रांतीय संगोष्ठी में राष्ट्रीय संयोजक ने कहा—आंतरिक सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, प्रत्येक नागरिक को निभानी होगी अपनी भूमिका

नजफगढ़ मेट्रो न्यूज/नई दिल्ली/राज्य ब्यूरो,। भारत रक्षा मंच, हरियाणा की ओर से रविवार को गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार के चौधरी रणबीर सिंह सभागार में प्रांतीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। “अवैध प्रवासन और भारत की आंतरिक सुरक्षा : राष्ट्रीय हित, सामाजिक प्रभाव एवं नीतिगत चुनौतियां” विषय पर आयोजित संगोष्ठी में भारत की आंतरिक सुरक्षा, अवैध प्रवासन, सीमावर्ती क्षेत्रों की चुनौतियों, रोजगार, मूलभूत सुविधाओं और युवाओं की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।

संगोष्ठी में वरिष्ठ प्रचारक एवं भारत रक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक श्री सूर्यकान्त केलकर मुख्य वक्ता रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार के कुलपति प्रो. विजय कुमार रहे, जबकि भारत रक्षा मंच के राष्ट्रीय मंत्री एवं संगठन क्षेत्र मंत्री सत्यवान बिरला विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संयोजन मदनलाल यादव ने किया। सह-संयोजक के रूप में प्रो. सुनील कुमार एवं एडवोकेट विशाल बिसला ने दायित्व संभाला। कार्यक्रम का मंच संचालन प्रो. सुनील कुमार ने किया तथा एडवोकेट विशाल बिसला ने सहयोग किया।

आंतरिक सुरक्षा के प्रति प्रत्येक नागरिक को सजग होना होगा : सूर्यकान्त केलकर

मुख्य वक्ता सूर्यकान्त केलकर ने भारत-बांग्लादेश सीमा से होने वाले अवैध प्रवासन और इससे उत्पन्न होने वाली विभिन्न चुनौतियों पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत-बांग्लादेश की लंबी सीमा तथा कुछ क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां सीमा प्रबंधन के लिए चुनौतीपूर्ण रही हैं। ऐसे में सीमा सुरक्षा को मजबूत करना और अवैध आवागमन पर प्रभावी नियंत्रण आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि अवैध प्रवासन का विषय केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध देश की आंतरिक सुरक्षा, नागरिक व्यवस्था और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों से भी है। उन्होंने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा केवल सरकार या सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक को अपने स्तर पर सजग और जिम्मेदार भूमिका निभानी होगी।

केलकर ने भारत रक्षा मंच की स्थापना का उल्लेख करते हुए कहा कि 27 जून 2010 को अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ के विषय को लेकर भारत रक्षा मंच की स्थापना की गई थी। उन्होंने कहा कि जब इस विषय को लेकर मंच की शुरुआत हुई थी, तब अनेक लोगों ने इसका उपहास भी किया, लेकिन आज संगठन देश के विभिन्न राज्यों और जिलों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत रक्षा मंच का उद्देश्य समाज में जागरूकता पैदा करना और राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर नागरिकों को संगठित करना है। उन्होंने युवाओं की भूमिका को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि युवा देश की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों में सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं।

सूर्यकान्त केलकर ने नागरिकता संशोधन अधिनियम सहित नागरिकता एवं अवैध प्रवासन से संबंधित विभिन्न सरकारी व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि नागरिकता की स्पष्ट पहचान और प्रभावी सीमा प्रबंधन देश की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने समाज से कानून के दायरे में रहते हुए जागरूकता बढ़ाने और राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया।

रोजगार और मूलभूत सुविधाओं पर पड़ सकता है प्रभाव : प्रो. विजय कुमार

मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. विजय कुमार ने भारत रक्षा मंच द्वारा उठाए जा रहे विषयों पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अवैध प्रवासन जैसे विषयों का प्रभाव केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि रोजगार, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और विकास के लिए नागरिकों में जागरूकता आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से देशहित में आगे आने का आह्वान करते हुए शिक्षा के प्रसार, स्वदेशी उत्पादों को अपनाने और आत्मनिर्भरता की भावना को मजबूत करने पर बल दिया।

प्रो. विजय कुमार ने कहा कि भारत के युवाओं में देश के प्रति आत्मगौरव की भावना मजबूत होनी चाहिए। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए युवाओं को सकारात्मक दिशा में अपनी ऊर्जा लगाने की अपील की।

सत्यवान बिरला ने बताया भारत रक्षा मंच का उद्देश्य

विशिष्ट अतिथि श्री सत्यवान बिरला ने उपस्थित कार्यकर्ताओं को भारत रक्षा मंच की स्थापना, उद्देश्यों और संगठनात्मक स्वरूप की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 27 जून 2010 को मंच की स्थापना अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे को लेकर की गई थी।

उन्होंने कहा कि मंच का उद्देश्य देश की सुरक्षा और राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर समाज में जागरूकता पैदा करना है। उन्होंने संगठन के विभिन्न राज्यों और जिलों में विस्तार तथा कार्यकर्ताओं द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी साझा की।

उन्होंने कहा कि देश के महत्वपूर्ण विषयों पर समाज में तथ्यपरक चर्चा और जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है तथा युवाओं को इस दिशा में आगे आना चाहिए।

युवाओं की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण

मुख्य वक्ता सूर्यकान्त केलकर ने संगोष्ठी में उपस्थित युवाओं से विशेष रूप से संवाद करते हुए कहा कि आने वाले समय में राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि युवा जागरूकता, सामाजिक सहभागिता और राष्ट्रहित के कार्यों के माध्यम से सकारात्मक योगदान दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर समाज को जागरूक करने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। संगोष्ठी में उपस्थित युवाओं एवं कार्यकर्ताओं ने उनके विचारों को गंभीरता से सुना।

बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक रहे मौजूद

संगोष्ठी में डॉ. कमलदत्त शर्मा, डॉ. विनोद छोकर, डॉ. संदीप राणा, डॉ. रामनिवास सैनी, राजेंद्र जाखड़, संजीत राठी, देशराज यादव, डॉ. विवेक सैनी, रोमिला जून, रेनु चहल, अजीत सैनी, डॉ. कुलवंत काजल, डॉ. दीपक पुनिया, डॉ. विकास मोर, अजय बूरा, जॉन्टी, विकास, दीपान्शु, संदीप गुरुग्राम, प्रताप सैनी, शकुंतला जाखड़, चंद्रभान वर्मा, रवि मोंगा, संजय भयाणा, विकास खरब, पवन वत्स, पवन कौशिक, सुनील दत्त शर्मा, नीरज गुप्ता, संजीव अरोड़ा, कुणाल तंवर, बलवान आर्य, मास्टर गिरीराज, विजय बालियाण, प्रदीप वर्मा एवं ईश्वर सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, युवा एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

अतिथियों को शाल एवं स्मृति चिन्ह देकर किया सम्मानित

कार्यक्रम के समापन अवसर पर मंच संचालक प्रो. सुनील कुमार ने मुख्य अतिथि, मुख्य वक्ता, विशिष्ट अतिथि, उपस्थित कार्यकर्ताओं एवं विश्वविद्यालय प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन का विशेष रूप से धन्यवाद किया कि संगोष्ठी के आयोजन के लिए सभागार उपलब्ध करवाया गया।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता श्री सूर्यकान्त केलकर, मुख्य अतिथि प्रो. विजय कुमार तथा अन्य अतिथियों को शाल एवं उपवस्त्र पहनाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

संगोष्ठी का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। उपस्थित कार्यकर्ताओं एवं युवाओं ने संगोष्ठी में रखे गए विचारों को गंभीरता से सुना और राष्ट्रहित तथा आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर आगे भी जागरूकता एवं सामाजिक संवाद को आवश्यक बताया।

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