‘अतिथि देवो भव’ की मिसाल: एसजीटी विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

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-डॉ. ऑरोरा मार्टिन बनीं दो देशों के विश्वविद्यालयों के बीच सेतु -अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल हुईं आर्मेनिया की विद्वान

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-   गुरुग्राम स्थित एसजीटी विश्वविद्यालय में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान भारतीय परंपरा ‘अतिथि देवो भव’ की भावना वास्तविक रूप में देखने को मिली। आर्मेनिया के येरेवन स्थित ब्रूसोव स्टेट यूनिवर्सिटी से आईं रोमानियन लैंग्वेज इंस्टीट्यूट की विशेषज्ञ डॉ. ऑरोरा मार्टिन ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि भारत में अतिथियों का जिस आत्मीयता से स्वागत किया जाता है, वह उनके लिए बेहद यादगार रहा। वह विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित “चेंजिंग डायनामिक्स ऑफ इंडिया’s नैरेटिव डिप्लोमेसी” विषयक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विशेष अतिथि के रूप में शामिल होने भारत आई थीं।

दो विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग का रास्ता खुला
इस कार्यक्रम के दौरान एक महत्वपूर्ण उपलब्धि यह भी रही कि एसजीटी विश्वविद्यालय और ब्रूसोव स्टेट यूनिवर्सिटी के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य दोनों संस्थानों के बीच शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देना, शोध और ज्ञान के आदान-प्रदान को मजबूत करना तथा छात्रों और शोधार्थियों के लिए नए अवसर उपलब्ध कराना है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां शिक्षा और सांस्कृतिक समझ को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने में अहम भूमिका निभाती हैं।

छात्रों को मिला जेंडर सिक्योरिटी पर विशेष प्रशिक्षण
भारत प्रवास के दौरान डॉ. ऑरोरा मार्टिन ने विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज, सोशल साइंसेज एंड लिबरल आर्ट्स में “जेंडर सिक्योरिटी” विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया। इस दौरान छात्रों को महिलाओं की सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं—व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक और वैश्विक स्तर—पर गहन चर्चा करने का अवसर मिला। कार्यक्रम में युवाओं को एक सुरक्षित और समान समाज बनाने में अपनी जिम्मेदारी समझने के लिए प्रेरित किया गया।

मीडिया में महिलाओं की छवि पर भी हुआ विचार-विमर्श
इसके अलावा उन्होंने एमर्जिंग मीडिया, कम्युनिकेशन एंड फिल्म स्टडीज़ विभाग में “राइट्स, जस्टिस एंड एक्शन फॉर ऑल वूमेन एंड गर्ल्स” विषय पर व्याख्यान दिया। इस सत्र में छात्रों ने मीडिया, सोशल मीडिया, विज्ञापन और फिल्मों में महिलाओं की छवि से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा की। साथ ही यह भी विचार किया गया कि किस प्रकार सकारात्मक और जिम्मेदार मीडिया के माध्यम से समाज में बेहतर संदेश दिया जा सकता है।

अप्रत्याशित परिस्थितियों में भी मिला पूरा सहयोग
डॉ. मार्टिन की भारत यात्रा उस समय कुछ दिनों के लिए बढ़ गई जब भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण उनकी वापसी की उड़ान रद्द हो गई। इस कठिन परिस्थिति में एसजीटी विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनकी हर संभव सहायता की। विश्वविद्यालय ने उनके ठहरने की व्यवस्था होटल और बाद में अतिथि गृह में की तथा वापसी यात्रा से जुड़ी अतिरिक्त व्यवस्थाओं में भी सहयोग दिया।

भारतीय संस्कृति से प्रभावित हुईं डॉ. मार्टिन
डॉ. ऑरोरा मार्टिन ने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें भारतीय संस्कृति के उस मूल भाव से परिचित कराया, जिसमें अतिथि को देवतुल्य माना जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” की भावना वास्तव में वैश्विक एकता और सहयोग का संदेश देती है। उनके अनुसार विश्वविद्यालयों के बीच ऐसे संवाद और सहयोग न केवल शिक्षा को समृद्ध करते हैं बल्कि विभिन्न संस्कृतियों के बीच मजबूत सेतु भी बनाते हैं।

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