G20 शिखर सम्मेलन 2025: पीएम मोदी पहुंचे जोहान्सबर्ग   

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-ट्रंप-पुतिन अनुपस्थित, दक्षिण अफ्रीका ने गरीब देशों पर जोर

अफ्रीकी/उमा सक्सेना/-   अफ्रीकी महाद्वीप पर पहली बार आयोजित G20 शिखर सम्मेलन 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिस्सा लिया। सम्मेलन स्थल जोहान्सबर्ग के नासरेक एक्सपो सेंटर पर दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने उनका औपचारिक स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान दुनिया के कई नेताओं से भी बातचीत की, जिसमें ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा सहित कई प्रमुख नेताओं से गर्मजोशी से मुलाकात और अभिवादन शामिल था।

सम्मेलन का उद्घाटन और अफ्रीका के संदेश
G20 समिट के उद्घाटन के दौरान राष्ट्रपति रामाफोसा ने कहा कि पहली बार अफ्रीकी धरती पर यह सम्मेलन आयोजित होना गर्व की बात है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सम्मेलन के माध्यम से एकजुटता, समानता और सतत विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। उनके अनुसार, एकजुटता और समान अवसर ही सभी देशों को साथ लेकर आगे बढ़ने में मदद करेंगे, जबकि सतत विकास भविष्य को ध्यान में रखते हुए ठोस समाधान प्रदान करेगा।

पीएम मोदी की द्विपक्षीय मुलाकातें
सम्मेलन में पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने वैश्विक मुद्दों, सहयोग और सामरिक संबंधों पर चर्चा की। बातचीत के दौरान उनकी मुलाकात हंसते-मुस्कुराते और दोस्ताना अंदाज में हुई, जो दर्शकों और कूटनीतिक विश्लेषकों के बीच चर्चा का विषय बनी।

ट्रंप और पुतिन की अनुपस्थिति
इस वर्ष के G20 सम्मेलन में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन उपस्थित नहीं हैं। ट्रंप की अनुपस्थिति के बावजूद सम्मेलन अपने निर्धारित एजेंडे के साथ आगे बढ़ रहा है। ट्रंप के बहिष्कार और दक्षिण अफ्रीका पर उनके आरोपों के बीच सम्मेलन में राजनीतिक तनाव भी देखा जा रहा है।

मुख्य मुद्दों पर चर्चा
इस बार की बैठक में मुख्य रूप से गरीब और जलवायु-प्रभावित देशों की मदद, विदेशी कर्ज में राहत, और हरित ऊर्जा सहयोग जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए हैं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने भी बताया कि दक्षिण अफ्रीका ने विकसित देशों के सामने इन मुद्दों को स्पष्ट रूप से रखा है। इसके बावजूद कुछ देशों के मतभेदों के कारण सहमत घोषणापत्र तैयार करना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।

घोषणापत्र और अमेरिका की अध्यक्षता
जी20 की प्रायः सर्वसम्मति पर आधारित प्रक्रिया इस बार भी चुनौतीपूर्ण रही। दक्षिण अफ्रीका ने स्पष्ट किया कि अमेरिका द्वारा सम्मेलन की अंतिम घोषणा को कमजोर करने का दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। सम्मेलन के अंत में घुमंतू अध्यक्षता दक्षिण अफ्रीका से अमेरिका को सौंप दी जाएगी। हालांकि व्हाइट हाउस ने केवल दूतावास के एक अधिकारी को अध्यक्षता हस्तांतरण समारोह में भेजने की घोषणा की, जिसे दक्षिण अफ्रीका ने अपमानजनक बताया।

दृष्टि: गरीब देशों की आवाज़
इन सभी राजनीतिक तनावों और कूटनीतिक मतभेदों के बीच दक्षिण अफ्रीका यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि पहला अफ्रीकी G20 सम्मेलन गरीब देशों और जलवायु प्रभावित क्षेत्रों की आवाज़ को विश्व स्तर पर प्रमुखता दे। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या सदस्य देश आपसी मतभेदों के बावजूद एक साझा घोषणापत्र पर सहमत हो पाएंगे।

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