
नजफगढ़ मेट्रो न्यूज/ नई दिल्ली/ शिवकुमार यादव : पित्ताशय (गाल ब्लैडर) की सर्जरी आम तौर पर सामान्य मानी जाती है, लेकिन कुछ मरीजों में ऑपरेशन के दौरान मुश्किलें बढ़ जाती हैं। ज्यादा सूजन, पहले हुए संक्रमण के कारण अंदर चिपकाव, पुराने रोग के कारण बने निशान या आसपास के अंगों की बनावट सामान्य से अलग होने पर सर्जन के लिए ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
वहीं, ऐसी स्थिति में रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी मददगार हो सकती है। एम्स के सर्जनों के अनुसार, इससे शरीर के अंदर का हिस्सा ज्यादा साफ दिखाई देता है और उपकरणों को अधिक नियंत्रित तरीके से चलाया जा सकता है।
एम्स के सर्जिकल डिसिप्लिन विभाग को विभिन्न विशेषज्ञताओं में 1500 से अधिक रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी का अनुभव है।
विभाग के प्रो. डॉ. हेमंगा के. भट्टाचार्जी ने कहा कि पित्ताशय की सर्जरी में सूजन और चिपकाव की वास्तविक स्थिति कई बार ऑपरेशन शुरू होने के बाद ही पता चलती है। ऐसी स्थिति में रोबोटिक तकनीक मुश्किल बनावट के बीच सर्जन को अधिक सटीक तरीके से काम करने में मदद कर सकती है।

रोबोटिक सर्जरी में साफ दिखता शरीर के अंदर का हिस्सा हाई-डेफिनिशन तीन आयामों वाली (थ्रीडी) तस्वीर में दिखाई देता है। इसमें इस्तेमाल होने वाले उपकरण कलाई की तरह अलग-अलग दिशाओं में घूम सकते हैं। इससे शरीर के अंदर छोटे और मुश्किल हिस्सों तक पहुंचकर सावधानी से काम करने में मदद मिलती है।
ओपन सर्जरी से रोबोटिक सर्जरी
एम्स के सर्जिकल डिसिप्लिन विभाग के प्रमुख डा. सुनील चुम्बर ने पित्ताशय की सर्जरी में बदलाव के कई दौर देखे हैं। उन्होंने ओपन सर्जरी, मिनी-लैपरोटामी, पारंपरिक लैप्रोस्कोपिक सर्जरी और अब रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी की है।
उन्होंने कहा कि इतने वर्षों तक लैप्रोस्कोपिक सर्जरी करने के बाद उनके अनुभव में रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी एक महत्वपूर्ण कदम आगे है और यह एक बेहतर सर्जिकल प्लेटफार्म है।
डा. सुनील चुम्बर के अनुसार, सर्जनों का अनुभव बढ़ने के साथ पित्ताशय की सर्जरी में रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ सकता है। उनका अनुमान है कि भविष्य में पित्ताशय की सर्जरी रोबोटिक तकनीक से होने लगेगी और पारंपरिक लैप्रोस्कोपी का इस्तेमाल धीरे-धीरे कम हो सकता है।
उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद ओपन सर्जरी से मिनी-लैपरोटामी, फिर लैप्रोस्कोपी और अब रोबोटिक सर्जरी तक का बदलाव देखा है। हर नई तकनीक पिछली तकनीक के अनुभव पर आगे बढ़ती है और उनके अनुसार लैप्रोस्कोपी के बाद रोबोटिक्स इस विकास की अगली कड़ी है।
एम्स के सर्जिकल डिसिप्लिन विभाग के हेड सर्जरी यूनिट-4 प्रो. असुरी कृष्णा ने कहा कि रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी सर्जनों के प्रशिक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे नई पीढ़ी के सर्जनों को शरीर की बनावट समझने और सर्जरी के दौरान उपकरणों की गतिविधियों को नियंत्रित करने का तरीका सीखने में मदद मिल सकती है।

सर्जन के नियंत्रण में होती है पूरी सर्जरी
रोबोट खुद से ऑपरेशन नहीं करता। पूरी प्रक्रिया के दौरान रोबोटिक प्रणाली का नियंत्रण सर्जन के पास रहता है। रोबोटिक तकनीक सर्जन की शरीर की बनावट की समझ या चिकित्सकीय निर्णय का स्थान नहीं लेती, बल्कि उसे बेहतर दृश्यता और उपकरणों पर अधिक नियंत्रण जैसी अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध कराती है।





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