बड़ा कदम: NGRMP परियोजना के लिए ₹9 करोड़ की स्वीकृति

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September 10, 2026

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-हिमालय संरक्षण पर सरकार का फोकस

देहरादून/उमा सक्सेना/-   देहरादून में राज्य सरकार ने हिमालयी क्षेत्रों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए एक अहम पहल की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ग्लेशियल झीलों से उत्पन्न संभावित खतरों को कम करने के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी उपायों को अपनाने पर जोर दिया है। इस दिशा में सरकार ने NGRMP (नेशनल ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड रिस्क मिटिगेशन प्रोग्राम) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ₹9 करोड़ की धनराशि को मंजूरी दी है।

विशेषज्ञों की टीम करेगी निगरानी
परियोजना के तहत राज्य की 13 संवेदनशील हिमनद झीलों की लगातार निगरानी, जोखिम विश्लेषण और रोकथाम के उपाय किए जाएंगे। इसके लिए एक विशेष वर्किंग ग्रुप का गठन किया गया है, जिसमें देश के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों और भू-वैज्ञानिक विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इस टीम का नेतृत्व वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी को सौंपा गया है।

आधुनिक तकनीक से होगा जोखिम नियंत्रण
वर्किंग ग्रुप आधुनिक निगरानी प्रणाली विकसित करेगा, साथ ही अर्ली वार्निंग सिस्टम (EWS) स्थापित किया जाएगा, ताकि किसी भी आपदा से पहले चेतावनी दी जा सके। इसके अलावा शोध, तकनीकी अध्ययन और समन्वित प्रयासों के जरिए जोखिम को कम करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

धनराशि का उपयोग और योजना
मंजूर की गई ₹9 करोड़ की राशि में से ₹7.80 करोड़ तकनीकी संसाधनों, सैटेलाइट इमेजरी, सॉफ्टवेयर, फील्ड कार्य और मानव संसाधन को मजबूत करने पर खर्च किए जाएंगे। वहीं ₹1.20 करोड़ का उपयोग सर्वेक्षण, जागरूकता अभियान और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के लिए किया जाएगा।

राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग से होगी परियोजना पूरी
यह परियोजना राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग से संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य हिमनद झीलों से संभावित खतरों को कम करना और समय रहते प्रभावी चेतावनी प्रणाली तैयार करना है, ताकि जन-जीवन और पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके।

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