मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत को राहत: अर्जेंटीना बना नया ऊर्जा सहारा

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October 23, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

-रसोई गैस सप्लाई पर नहीं पड़ेगा असर

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-    पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालातों के बीच जहां ऊर्जा आपूर्ति पर संकट की आशंका बढ़ जाती है, वहीं भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। इस चुनौतीपूर्ण समय में दक्षिण अमेरिका का देश अर्जेंटीना भारत के लिए एक मजबूत सहयोगी बनकर उभरा है। वर्ष 2026 की शुरुआत के मात्र तीन महीनों में ही अर्जेंटीना ने भारत को एलपीजी की आपूर्ति में बड़ा इजाफा करते हुए करीब 50,000 टन गैस भेजी है, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

सप्लाई में दोगुनी बढ़ोतरी, संकट में मिली राहत
पिछले वर्ष 2025 की तुलना में यह आपूर्ति दोगुनी से भी अधिक है, जब केवल 22,000 टन गैस भारत भेजी गई थी। विशेषज्ञों के अनुसार, मिडिल ईस्ट में हालात बिगड़ने से पहले ही अर्जेंटीना ने समय रहते भारत के लिए बड़े पैमाने पर गैस भेजनी शुरू कर दी थी। बाहिया ब्लांका बंदरगाह से करीब 39,000 टन गैस पहले ही रवाना की गई थी, जबकि मार्च 2026 में 11,000 टन का अतिरिक्त कार्गो भारत पहुंचा।

नए सप्लायर के रूप में अर्जेंटीना का उभार
दिलचस्प बात यह है कि वर्ष 2024 से पहले अर्जेंटीना से भारत को एलपीजी का कोई निर्यात नहीं होता था। लेकिन अब यह देश तेजी से भारत के ऊर्जा बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। उत्पादन के स्तर पर भी अर्जेंटीना ने उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है और आने वाले समय में नई तकनीकी इकाइयों के जरिए उत्पादन क्षमता और बढ़ाने की योजना है।

व्यापारिक रिश्तों में भी आई मजबूती
ऊर्जा क्षेत्र के साथ-साथ दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध भी तेजी से मजबूत हो रहे हैं। वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच व्यापार में 36% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई, जो 6 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गया। भारत आज अर्जेंटीना का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार बन चुका है। खाद्य तेल, अनाज, दालें और अन्य जरूरी वस्तुओं का आयात भी बड़ी मात्रा में अर्जेंटीना से किया जा रहा है।

भविष्य की ऊर्जा जरूरतों पर भी नजर
भारत और अर्जेंटीना अब दीर्घकालिक ऊर्जा सहयोग की दिशा में भी कदम बढ़ा रहे हैं। तेल और गैस के अलावा हाइड्रोकार्बन, खनिज और लिथियम जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों पर भी साझेदारी मजबूत की जा रही है। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते हुए हैं, जो भविष्य में भारत की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करेंगे।

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