
मानसी शर्मा /- 24 सितंबर, बुधवार को लद्दाख के लेह में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसा में बदल गया। इस हिंसा के दौरान 4 लोगों की मौत हो गई और 40 सुरक्षाकर्मियों समेत 70 से अधिक लोग घायल हुए। पुलिस ने अब तक 50 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह हिंसा राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल किए जाने के साथ संवैधानिक सुरक्षा उपायों की मांग को लेकर भड़की।
आगजनी और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
प्रदर्शन के दौरान बीजेपी कार्यालय में आग लग गई। इस घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज़ी से आईं। वामपंथी दलों ने मोदी सरकार को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया। वहीं, एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने शांति की अपील करते हुए अपनी 15 दिन पुरानी भूख हड़ताल समाप्त कर दी।
केजरीवाल का बयान
दिल्ली के पूर्व सीएम और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा:
“आज लद्दाख में जो हो रहा है वह बेहद चिंताजनक है। हर सच्चे देशभक्त को लद्दाख के लोगों का साथ देना चाहिए। हमने अंग्रेज़ों से इसलिए आजादी नहीं ली थी कि जनता अब बीजेपी की गुलाम बन जाए।”
उन्होंने आगे कहा कि भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने लोकतंत्र के लिए बलिदान दिया था, ताकि हर भारतीय अपनी सरकार चुन सके। लेकिन आज बीजेपी सत्ता के नशे में राज्यों को केंद्र शासित प्रदेश बना रही है और संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों को छीन रही है।





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