नई दिल्ली/सिमरन मोरया/- द्वारका सेक्टर-3 स्थित मधु विहार क्षेत्र में दिल्ली जल बोर्ड की डीप सीवर परियोजना पिछले लगभग चार वर्षों से अधूरी पड़ी होने के कारण स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश और चिंता का माहौल है। मात्र 45 दिनों में पूरा होने वाला यह कार्य टस से मस नहीं हुआ है, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा और यातायात दोनों पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
जानकारी के अनुसार, 27 अप्रैल 2022 को लगभग ₹1.34 करोड़ की लागत से स्वीकृत इस डीप सीवर परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र की पुरानी सीवर समस्या का स्थायी समाधान करना था। लेकिन निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी काम अधूरा है। परियोजना के तहत मधु विहार सी-ब्लॉक स्थित महाराणा प्रताप द्वार के पास सर्विस रोड पर लगभग 30 फीट गहरा खुला गड्ढा आज भी जोखिम का कारण बना हुआ है।
यह मार्ग क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो इसे दैनिक आवागमन के लिए उपयोग करते हैं। इसी रास्ते से छात्र, महिलाएँ, वरिष्ठ नागरिक और नौकरीपेशा लोग द्वारका सेक्टर-2, शैक्षणिक संस्थानों, स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों तक पहुंचते हैं।

दुर्घटनाओं और जाम से बढ़ी परेशानी-
स्थानीय निवासियों के अनुसार, खुले गड्ढे और अधूरे सड़क निर्माण के कारण पिछले चार वर्षों में कई दुर्घटनाएँ हो चुकी हैं। 31 अक्टूबर 2023 को एक कार के इस गड्ढे में गिरने की घटना भी सामने आई थी, जिसमें चालक गंभीर रूप से घायल हुआ था।
वर्तमान में स्थिति यह है कि सड़क का एक हिस्सा पूरी तरह बंद कर दिया गया है, जबकि दूसरी लेन भी बाधित है। इसके चलते रोजाना घंटों लंबा ट्रैफिक जाम लग रहा है। कई दोपहिया वाहन चालक मजबूरी में गलत दिशा से वाहन चलाने को मजबूर हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा और बढ़ गया है।
स्थानीय लोगों में नाराजगी, प्रशासन पर सवाल-
फेडरेशन ऑफ साउथ एंड वेस्ट डिस्ट्रिक्ट वेलफेयर फोरम के चेयरमैन एवं समाजसेवी रणबीर सिंह सोलंकी ने कहा कि वे और क्षेत्रवासी पिछले कई वर्षों से लगातार दिल्ली जल बोर्ड और संबंधित अधिकारियों को शिकायतें दे रहे हैं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि यह केवल अधूरी परियोजना नहीं, बल्कि हजारों लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
एलजी और मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग-
स्थानीय निवासियों और समाजसेवियों ने उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री, दिल्ली से मांग की है कि—परियोजना को युद्धस्तर पर पूरा किया जाए और खुले 30 फीट गहरे गड्ढे को तुरंत सुरक्षित कर मार्ग बहाल किया जाए। 4 वर्षों की देरी की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए साथ ही क्षेत्र में स्थायी वैकल्पिक यातायात व्यवस्था लागू की जाए।
लोगों का कहना है कि यह मामला अब केवल निर्माण कार्य की देरी नहीं, बल्कि जनसुरक्षा का गंभीर मुद्दा बन चुका है, जिस पर तत्काल कार्रवाई आवश्यक है।


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