देश के वीर अब बनेंगे स्कूली किताबों का हिस्सा, NCERT ने लिया ऐतिहासिक फैसला

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देश के वीर अब बनेंगे स्कूली किताबों का हिस्सा, NCERT ने लिया ऐतिहासिक फैसला

-फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ की कहानी अब 8वीं कक्षा की उर्दू किताब में पढ़ाई जाएगी

नई दिल्ली/सिमरन मोरया/- एनसीआरटी के सिलेबस में बड़े बदलाव का ऐलान हुआ है। दरअसल, अब फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ, ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान और मेजर सोमनाथ शर्मा की कहानियां स्टूडेंट्स के सिलेबस में शामिल की जाएंगी। यह घोषणा रक्षा मंत्रालय ने की, जिसे लेकर 7 अगस्त को ट्वीट किया गया। विस्तार से जानते हैं पूरा मामला और समझते हैं कि ये हमारे बच्चों के लिए क्यों जरूरी है?

सिलेबस में क्या हुआ बदलाव?
रक्षा मंत्रालय के ऑफिशियल ट्वीट के मुताबिक, NCERT ने अपने सिलेबस में तीन वीर सैनिकों की जिंदगी और उनके बलिदान की कहानियां जोड़ दी हैं। फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ की कहानी अब 8वीं कक्षा की उर्दू किताब में पढ़ाई जाएगी। ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान की कहानी 7वीं कक्षा की उर्दू किताब में होगी और मेजर सोमनाथ शर्मा की कहानी 8वीं कक्षा की अंग्रेजी की किताब में शामिल की गई है। यह कदम इसलिए उठाया गया, जिससे बच्चे देश के सैनिकों की वीरता और त्याग से प्रेरणा ले सकें। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इससे बच्चों को न सिर्फ भारत के सैन्य इतिहास की जानकारी मिलेगी, बल्कि उन्हें हिम्मत, सहानुभूति, भावनात्मक समझ और देश निर्माण में योगदान देने की सीख भी मिलेगी।

कौन थे ये तीनों वीर?
फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ: सैम मानेकशॉ को लोग सैम बहादुर के नाम से भी जानते हैं. वह देश के पहले फील्ड मार्शल थे, जो 1973 में इस रैंक तक पहुंचे। 3 अप्रैल 1914 को अमृतसर में जन्मे मानेकशॉ का निधन 27 जून 2008 को हुआ। उन्होंने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में बड़ी भूमिका निभाई, जिसमें 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था। उनकी रणनीति और हिम्मत की वजह से ही बांग्लादेश आज आजाद देश है। उनकी जिंदगी की कहानी बच्चों को बताएगी कि मेहनत और हौसले से कैसे मुश्किलों को हराया जा सकता है।

ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान: ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान भारत के उन मुस्लिम सैनिकों में से एक थे, जिन्होंने 1947 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अपनी जान की परवाह किए बिना देश की सेवा की। उनका जन्म 15 जुलाई 1912 को उत्तर प्रदेश के बीबीपुर में हुआ था। 3 जुलाई 1948 को वह जंग के मैदान में शहीद हो गए। उस्मान ने जम्मू-कश्मीर में झंगर को दुश्मन से वापस लेने की कसम खाई थी और अपनी जान देकर उसे पूरा किया। उनकी कहानी बच्चों को सिखाएगी कि सच्चा देशभक्त धर्म से ऊपर देश को चुनता है।

मेजर सोमनाथ शर्मा: मेजर सोमनाथ शर्मा देश के पहले परमवीर चक्र विजेता थे, जो उन्हें मरणोपरांत दिया गया। उनका जन्म 31 जनवरी 1923 को हुआ और 3 नवंबर 1947 को वह कश्मीर के बादगाम में शहीद हो गए। उन्होंने श्रीनगर हवाई अड्डे की रक्षा के लिए अपनी पूरी कंपनी के साथ दुश्मनों से लोहा लिया। उनकी बहादुरी की वजह से आज हम कश्मीर को सुरक्षित मानते हैं। उनकी कहानी बच्चों को सिखाएगी कि अपनी ड्यूटी के लिए जान भी दे देनी चाहिए।

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