एक बार फिर दुर्घटना में घायल लोगों के लिए फरिश्ता बने डीसीपी शशांक जायसवाल

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September 23, 2026

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एक बार फिर दुर्घटना में घायल लोगों के लिए फरिश्ता बने डीसीपी शशांक जायसवाल

-पहले भी चार बार कर चुके हैं घायलों की मदद

नई दिल्ली/- टीम डिजिटल वसंत कुंज इलाके में दुर्घटनाग्रस्त डंपर में फंसे दो घायलों के लिए ट्रैफिक पुलिस में तैनात डीसीपी शशांक जायसवाल फरिश्ता साबित हुए। आईपीएस अधिकारी ने देर रात करीब 3 बजे दुर्घटना स्थल पर गाड़ी रुकवाई। लोगों की मदद से डंपर में फंसे लोगों को बाहर निकाला। उन्हें वह खुद ही अस्पताल लेकर गए। खुद पीसीआर कॉल की तथा सुबह तक अस्पताल में डटे रहे। हादसे में एक युवक की आंख निकलकर बाहर आ गई थी। घायलों की पहचान जगदीश तथा दिनेश के रूप में हुई है। दोनों पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर इलाके के रहने वाले हैं।

जानकारी के अनुसार डीसीपी ट्रैफिक शशांक जायसवाल आईआईएम में लेक्चर देने गए थे। वहां से देर रात वह एयरपोर्ट पर उतरे। इसके बाद वह अपने घर जा रहे थे। वसंत कुंज इलाके में उनकी नजर सडक़ पर खड़े एक दुर्घटनाग्रस्त डंपर पर पड़ी। तत्काल गाड़ी रुकवा उन्होंने लोगों की मदद से घायलों को बाहर निकाला। इसके बाद दोनों को वसंत कुंज के फोर्टिस अस्पताल पहुंचाया गया।

लगातार डॉक्टरों के संपर्क में रहे डीसीपी
डीसीपी का स्टॉफ सड़क़ पर ट्रैफिक को नियंत्रित करता रहा जिससे घायलों को उपचार मिलने में विलंब न हो। डीसीपी ने पुलिस कंट्रोल रूम को मामले की सूचना दी। एक घायल की दाहिनी आंख निकलकर बाहर आ गई थी। घायलों की गंभीर हालत को देखते हुए फोर्टिस अस्पताल ने उन्हें एम्स ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। घायल की जान बचाने के लिए डॉक्टरों ने तत्काल आंख की सर्जरी शुरू की। डीसीपी शशांक जायसवाल इस दौरान अस्पताल में रहकर डॉक्टरों के संपर्क में रहे। सुबह 5.30 बजे तक वह घायलों का हाल जानने के लिए अस्पताल में ही डटे रहे। घायल का ऑपरेशन होने के बाद ही वह गए।

4 बार पहले भी बचा चुके हैं लोगों की जान
घायलों की जान बचाने का डीसीपी शशांक जायसवाल का यह चौथा मामला है। दुर्घटनास्थल पर जब भी वह किसी घायल को देखते हैं गाड़ी रोककर उसकी मदद को पहुंच जाते हैं। इससे पहले भी सडक़ दुर्घटना में घायल व्यक्ति को सीपीआर देकर शशांक जायसवाल ने जान बचाई थी। उनका खुद भी यही कहना है कि घायलों की मदद को सभी आगे आएं। अमूमन देखा जाता है कि लोग रील बनाते रहते हैं घायल की तरफ किसी का ध्यान नहीं होता। यह आदत छोड़नी होगी।

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