बिहार के कोच में दौड़ेगी अफ्रीकी रेल, पायलटों को मिलेगी आधुनिक सुविधाएं

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बिहार के कोच में दौड़ेगी अफ्रीकी रेल, पायलटों को मिलेगी आधुनिक सुविधाएं

बिहार/सिमरन मोरया/- बिहार के सारण जिले में बने रेल कोच अब अफ्रीका के गिनी गणराज्य में अपनी छाप छोड़ने के लिए तैयार हैं। रेल मंत्रालय 150 अत्याधुनिक रेल इंजनों का एक्सपोर्ट गिनी को करेगा, जिनमें लोको पायलटों के लिए वातानुकूलित केबिन, रेफ्रिजरेटर और माइक्रोवेव जैसी सुविधाएं होंगी। इन इंजनों का निर्माण पटना के पास मढ़ौरा रेल फैक्ट्री में वेब टेक कंपनी और भारतीय रेलवे के सहयोग से हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज, 20 जून 2025 को पहले इंजन को हरी झंडी दिखाकर एक्सपोर्ट की शुरुआत करेंगे।

गिनी की जरूरतों के लिए खास डिजाइन
वेब टेक के एक अधिकारी ने बताया कि गिनी ने अपने ट्रेन चालक दल की सुविधा के लिए विशेष इंजन मांगे हैं। गिनी की कठोर जलवायु और ट्रेन को ध्यान में रखते हुए इंजनों को कस्टमाइज किया गया है। इनमें स्टैंडर्ड गेज रेलवे ट्रैक और स्थानीय पर्यावरण के लिए उपयुक्त डिजाइन शामिल हैं। लोको पायलटों के लिए रेफ्रिजरेटर और माइक्रोवेव की सुविधा गिनी की मांग पर जोड़ी गई है।

मढ़ौरा फैक्ट्री  ने रचा इतिहास
मढ़ौरा रेल फैक्ट्री की शुरुआत 2015 में भारतीय रेलवे के साथ हुए समझौते के तहत हुई थी। इसके तहत 10 साल में 4,500और 6,000हॉर्सपावर के 1,000मालवाहक इंजन बनाए जाते हैं। 2018 में पहला इंजन सप्लाई हुआ था और अब तक 700 से अधिक इंजन सप्लाई हो चुके हैं। गिनी का 150 इंजन का ऑर्डर अतिरिक्त है, जिसके लिए फैक्ट्री में कार्यबल बढ़ाया गया है। यह निर्यात गिनी की सबसे बड़ी लौह अयस्क खनन परियोजना के लिए माल ढुलाई में मदद करेगा।

भारत-अफ्रीका सहयोग को बढ़ावा
रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक दिलीप कुमार ने कहा कि यह निर्यात गिनी की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मजबूत करेगा और भारत-अफ्रीका आर्थिक संबंधों को गहरा करेगा। मढ़ौरा फैक्ट्री अब लोकोमोटिव निर्यात का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिससे स्थानीय रोजगार और तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलेगा।

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