मंगल ग्रह का जीवन बदल सकता है यह पौधा, काई को लेकर वैज्ञानिकों का बड़ा दावा

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October 27, 2026

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मंगल ग्रह का जीवन बदल सकता है यह पौधा, काई को लेकर वैज्ञानिकों का बड़ा दावा

-बंजर चट्टानो को भी उपजाऊ मिट्टी में बदलने की ताकत रखता है यह पौधा, वैज्ञानिकों की बड़ी खोज

नजफगढ़ मेट्रो न्यूज/ नई दिल्ली/अनीशा चौहान/- अंतरिक्ष में जीवन की खोज को लेकर पूरे विश्व समुदाय के वैज्ञानिक जुटे हुए हैं लेकिन अब वैज्ञानिकों को एक ऐसी सफलता हाथ लगी है जिससे मंगल ग्रह पर जीवन को लेकर वैज्ञानिक काफी उत्साहित है। स्पेस वैज्ञानिकों ने एक ऐसे पौधे का पता लगाया है जो मंगल ग्रह के जीवन चक्र को बदल सकता है। वैज्ञानिकों का दावा है कि यह पौधा मंगल ग्रह पर पल बढ़ सकता है।
           वैज्ञानिकों ने एक ऐसे पौधे का पता लगाया है जिसके बारे में माना जा रहा है कि यह मंगल की सतह पर भी उग सकता है और सर्वाइव कर सकता है। आइए जानते हैं इस अनोखे पौधे के बारे में।

         आपको बता दें कि कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यह नॉन वैस्क्युलर पौधा मंगल ग्रह पर भी सर्वाइव कर सकता है।  काई यानी मॉस को धरती के सबसे शानदार टेराफॉर्मर्स में से एक माना जाता है। समय के साथ यह बंजर चट्टानों को भी उपजाऊ मिट्टी में बदल देती है। वहीं, अब इस पौधे को लेकर बेहद रोचक जानकारी सामने आई है। आपको यह तो पता ही होगा कि अंतरिक्ष में जीवन की खोज को लेकर वैज्ञानिक समुदाय तेज रफ्तार से काम कर रहा है। इसके अलावा यह जानने की कोशिश भी की जा रही है कि क्या इंसानों को किसी और ग्रह पर बसाया जा सकता है? ऐसे ग्रहों में सबसे ऊपर नाम मार्स यानी मंगल ग्रह का आता है। अब आप सोच रहे होंगे कि मंगल और कई में क्या कनेक्शन है?
             

कभी धरती भी नहीं थी जीवन के लायक
एक समय में धरती की सतह भी ऐसी थी जिसे जीवन के लिए उपयुक्त नहीं माना जा सकता था। लेकिन ब्रायोफाइट्स नाम के ऑर्गेनिज्म्स के एक समूह को यह तथ्य रोक नहीं सका। इस समूह में अब मॉस, लिवरवॉर्ट्स और हॉर्नवॉर्ट्स जैसे पौधे भी आते हैं। इनकी इस एबिलिटी को देखते हुए वैज्ञानिकों का मानना है कि ये मंगल पर भी सर्वाइव कर सकते हैं। मंगल पर इंसानों को बसाने के प्लान में ये मॉस काफी अहम रोल अदा कर सकते हैं। ये वहां की जमीन को उपजाऊ बना सकते हैं और उसे ऐसा बना सकते हैं जिससे उस पर खेती की जा सके। मॉस के जिस प्रकार से यह उम्मीद है उसे सिंत्रिशिया केनिनर्विस (Syntrichia caninervi) कहते हैं। यह चीन, अमेरिका, पामीर के पठार, तिब्बत, मिडिल ईस्ट, अंटार्कटिका आदि जगहों पर पाई जाती है।

मंगल जैसी परिस्थितियों में रखी गई मॉस
चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के वैज्ञानिकों ने इस मॉस की जांच की और पाया कि सर्वाइवल को लेकर इसके गुणों को काफी बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। लैब में वैज्ञानिकों ने पानी की कमी से लेकर बर्फीली परिस्थितियों में इस मॉस को जांचा और परिणाम हैरान करने वाले रहे। इतना ही नहीं वैज्ञानिकों ने इस मॉस को वैसी परिस्थितियों में भी रखा गया जैसी मंगल ग्रह पर है। ऐसी परिस्थितियों में भी इसको सर्वाइव करते हुए देखा गया। अब वैज्ञानिकों का टारगेट इस मॉस को मंगल पर पहुंचाना है। अगर ये एक्सपेरिमेंट सही साबित होता है तो किसी और ग्रह पर इंसान को बसाने की राह में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर बन जाएगा। वैज्ञानिकों के अनुसार यह मॉस मंगल पर जीवन को जन्म दे सकती हैं।

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