23 मिनट जेल में रखने की सजा 50 हजार देकर भुगतेगी पुलिस

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031
May 1, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

23 मिनट जेल में रखने की सजा 50 हजार देकर भुगतेगी पुलिस

- पुलिस अधिकारी खुद कानून नहीं बन सकते: हाईकोर्ट - दो एसआई की सैलरी से काट पीड़ित को पुलिस देगी मुआवजा

मानसी शर्मा / – दिल्ली हाईकोर्ट ने बेवजह 23 मिनट तक लॉकअप में रखे गए एक शख्स को 50 हजार रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि संदेश साफ जाना चाहिए कि पुलिस अधिकारी खुद कानून नहीं बन सकते हैं। खास बात यह है कि यह जुर्माना पुलिसकर्मियों को अपनी सैलरी से भरना होगा।

पुलिस वालों की सैलरी से कटेगा जुर्माना

जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने निर्देश दिया कि मुआवजे की राशि बदरपुर पुलिस स्टेशन में तैनात दो एसआई के वेतन से वसूल की जाए, जो उस शख्स को उठाकर लाए और बिना किसी कारण लॉकअप में बंद कर दिया। बेंच ने कहा कि आरोपी पुलिसकर्मियों ने याचिकाकर्ता को उसकी आजादी से वंचित किया और लॉकअप में बिताए गए उसके समय, भले ही कम देर के लिए, की वजह से पुलिस अधिकारियों को दोषमुक्त नहीं किया जा सकता है। बेंच ने कहा कि इन्हें ऐसी सजा दी जाए कि भविष्य में फिर ऐसा न करें।

बिना केस दर्ज किए लॉकअप में रखा

बेंच पीड़िता की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसने पिछले साल सितंबर में अवैध तरीके से हिरासत में रखे जाने की वजह से मुआवजे की मांग की थी।  मामले के अनुसार पुलिस को शिकायत मिली थी कि एक महिला  को सब्जी वाले ने चाकू मार दिया है। पुलिस जब वहां पहुंची तो महिला और याचिकाकर्ता मिले। याचिकाकर्ता का कहना है कि पुलिस उसे उठा लाई और लॉकअप में बंद कर दिया। 11:01 बजे से 11:24 तक उसे लॉकअप में बंद रखा गया। याचिकाकर्ता ने कहा कि उसे बिना किसी एफआईआर और प्रक्रियाओं के पालन के हिरासत में लिया गया और लॉकअप में भी बंद किया गया।

इस केस में निंदा काफी नहीं

मामले का निपटारा करते हुए जस्टिस प्रसाद ने कहा कि याचिकाकर्ता की आजादी का सम्मान किए बिना मनमाने ठंग से काम किया गया और उसे बिना प्रक्रिया का पालन किए लॉकअप में बंद कर दिया। बेंच ने इस बात को लेकर दुख जाहिर किया कि याचिकाकर्ता को उठा कर बिना किसी वजह से लॉकअप में बंद कर दिया गया। बेंच ने इस बात को लेकर भी चिंता जाहिर की कि पुलिस नागरिकों से ऐसे बर्ताव करने लगती है जैसे वे कानून से ऊपर हैं। बेंच ने कहा कि इस केस में सिर्फ निंदा काफी नहीं है, ऐसी सजा भी दी जाए जिसे याद रखा जाए।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox