मनीष सिसोदिया पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों का गुजरात व हिमाचल चुनाव पर पडे़गा असर

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मनीष सिसोदिया पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों का गुजरात व हिमाचल चुनाव पर पडे़गा असर

-आप हो सकती है कमजोर, केजरीवाल के दाहिने हाथ के रूप में जाने जाते है सिसोदिया

नई दिल्ली/- दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और अरविंद केजरीवाल के सबसे करीबी मनीष सिसोदिया बहुत कम समय में आम आदमी पार्टी सरकार का चेहरा बनकर उभरे हैं। हालांकि, उनके खिलाफ पहली बार भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे हैं। सिसोदिया नई आबकारी नीति को लेकर आरोपों का सामना कर रहे हैं। मनीष सिसोदिया पर लगे भ्रष्टचारों के आरोपों का निश्चित रूप से गुजरात व हिमाचल के चुनावों पर असर पड़ेगा। आम आदमी पार्टी कमजोर भी हो सकती है क्योंकि मनीष सिसोदिया को केजरीवाल के दाहिने हाथ के रूप में जाना जाता है।
              उत्तर प्रदेश के हापुड़ के रहने वाले 50 वर्षीय सिसोदिया ने भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता में डिप्लोमा करने से पहले एक सरकारी स्कूल में पढ़ाई की। जब वह अरविंद केजरीवाल के संपर्क में आए तो वह मीडिया में काम कर रहे थे। वह धीरे-धीरे केजरीवाल जैसे सामाजिक कार्यकर्ता में बदल गए। उन्होंने एनजीओ परिवर्तन में एक साथ काम किया। राशन की उपलब्धता, बिजली के बिल और सूचना के अधिकार जैसे मुद्दों को उठाया। उन्होंने विशेष रूप से पूर्वी दिल्ली की झुग्गियों में व्यापक काम किया। अन्ना हजारे के इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन में भी उन्होंने सक्रियता दिखाई।
              लोग सिसोदिया को अरविंद केजरीवाल के दाहिने हाथ के रूप में देखते हैं। उनकी टीम के एक सदस्य ने प्रेस को बताया, “मनीष सिसोदिया ने पार्टी के राजनीतिक मामलों को देखने के साथ-साथ एक से अधिक मौकों पर सरकार के कामकाज को अकेले ही संभाला है। दोनों के बीच अटूट विश्वास है। उन्हें ऐसे व्यक्ति के रूप में जाना जाता है जो मुख्यमंत्री के दृष्टिकोण के लिए एक रोडमैप देने में सक्षम है। जरूरत पड़ने पर उन्हें वास्तविकता से भी अवगत कराते हैं।”
              अरविंद केजरीवाल सिसोदिया पर कितना भरोसा करते हैं यह उनके विभागों से स्पष्ट है। केजरीवाल ने वित्त, शिक्षा, स्वास्थ्य, गृह, सतर्कता, पीडब्ल्यूडी, योजना, शहरी विकास और भूमि और भवन जैसे विभागों की जिम्मेदारी सिसोदिया को दी है। जब सत्येंद्र जैन को कथित हवाला लेनदेन को लेकर प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तार किया गया था, तब उन्हें उन विभागों की भी जिम्मेदारी दी गई थी जो सत्येंद्र जैन के पास थे।
              आप नेताओं ने दिल्ली सरकार के स्कूलों में “क्रांति“ लाने के लिए सिसोदिया को श्रेय दिया है। हालांकि, विपक्ष सिसोदिया और आप सरकार पर दिल्ली के स्कूलों में “प्रगति“ की झूठी तस्वीर पेश करने का आरोप लगाता है। पिछले साल दिल्ली भाजपा नेताओं ने शहर में स्कूल कक्षाओं के निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था और सिसोदिया और जैन के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में शिकायत दर्ज कराई थी।
             सिसोदिया के खिलाफ आरोप ऐसे समय में आए हैं जब आप की नजर आने वाले गुजरात और हिमाचल प्रदेश चुनावों में बड़े लाभ पर है। दोनों राज्यों में वर्तमान में भाजपा का शासन है। अब तक आप के सभी चुनावी अभियानों ने शिक्षा और दिल्ली में सिसोदिया द्वारा किए गए कार्यों को अपने अभियान के केंद्र में रखा है। अलग-अलग राज्यों और शहरों में प्रचार भाषणों में अरविंद केजरीवाल बार-बार कहते हैं, “मुझे नफ़रत फैलनी नहीं आती। मुझे राजनीति नहीं आती। स्कूल बनाने आते हैं।”
               आम आदमी पार्टी अच्छी तरह से जानती है कि सीएम केजरीवाल पिछले कुछ दिनों में बार-बार केंद्र के निशाने पर रहने की बात कर रहे हैं। हाल ही में विधानसभा सत्र में केजरीवाल ने कहा कि सिसोदिया को अगली कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। उनकी ओर इशारा करते हुए और पूछा, “क्या वह आपको चोर की तरह दिखते हैं?“

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